हिमांशु सिंह हत्याकांड: जमशेदपुर के CCR डीएसपी मनोज कुमार ठाकुर पर अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा

जमशेदपुर के हिमांशु सिंह हत्याकांड में तत्कालीन सीसीआर डीएसपी मनोज कुमार ठाकुर पर अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की गई।

जमशेदपुर के चर्चित हिमांशु सिंह हत्याकांड में लापरवाही बरतने के आरोप में तत्कालीन सीसीआर डीएसपी मनोज कुमार ठाकुर के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा राज्य सरकार को भेजी गई है। जांच रिपोर्ट में घटना के समय प्रभावी कदम न उठाने और पर्यवेक्षण में गंभीर कमी पाए जाने के बाद पुलिस मुख्यालय द्वारा यह सख्त कदम उठाया गया है।

हिमांशु सिंह हत्याकांड में बढ़ी कार्रवाई, जांच के दायरे में आए तत्कालीन सीसीआर डीएसपी

जमशेदपुर: चर्चित हिमांशु सिंह हत्याकांड में पुलिस विभाग के भीतर जवाबदेही तय करने की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। जमशेदपुर के तत्कालीन एसएसपी, सरायकेला की एसपी और बिष्टुपुर थाना प्रभारी के बाद अब तत्कालीन सीसीआर (CCR) डीएसपी मनोज कुमार ठाकुर भी इस मामले में जांच के दायरे में आ गए हैं। उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।

मीडिया रिपोर्टों से मिली जानकारी के अनुसार, जमशेदपुर सिटी एसपी की जांच रिपोर्ट के आधार पर रांची जोन के आईजी सह एडीजी (सीआईडी) ने डीएसपी मनोज कुमार ठाकुर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश पुलिस मुख्यालय को भेजी थी। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, पुलिस मुख्यालय ने इस अनुशंसा को स्वीकार करते हुए आगे की कार्रवाई के लिए अपना प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है।


जांच रिपोर्ट में लापरवाही और पर्यवेक्षण में कमी के आरोप

समय पर घटनास्थल नहीं पहुंचने का आरोप

जांच रिपोर्ट में तत्कालीन सीसीआर डीएसपी मनोज कुमार ठाकुर पर ड्यूटी के दौरान गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हिमांशु सिंह हत्याकांड की जानकारी मिलने के बावजूद उन्होंने समय पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की। इसके साथ ही बिष्टुपुर क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बिगड़ने के दौरान वे समय पर घटनास्थल पर भी नहीं पहुंचे।

पर्यवेक्षण में पाई गई गंभीर कमी

रिपोर्ट में इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि डीएसपी मनोज कुमार ठाकुर के पर्यवेक्षण में गंभीर कमी पाई गई। समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए जाने के कारण अपराधियों के हौसले बढ़े और वे इस बड़ी वारदात को अंजाम देने में सफल रहे। इसी लापरवाही और विभागीय शिथिलता को आधार बनाते हुए उनके खिलाफ सख्त विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा राज्य सरकार को अग्रसारित की गई है।

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