नई दिल्ली में वाणिज्य मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारतीय इस्पात निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में राहत प्रदान करेगा। मंत्रालय के अनुसार, यूरोपीय संघ को होने वाले भारत के कुल इस्पात निर्यात का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा नए एफटीए ढांचे के तहत सुरक्षित रहेगा।
भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते से इस्पात निर्यातकों को राहत
नई दिल्ली में वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) के नाम से जाना जाने वाला भारत-ईयू एफटीए (FTA) यूरोप को होने वाले भारतीय इस्पात निर्यात पर टैरिफ और कार्बन नियमों के प्रभाव को कम करेगा। मंत्रालय के अनुसार, 1 जुलाई से एफटीए के तहत 1.6 मिलियन टन का टैरिफ रेट कोटा लागू हो चुका है।
2.5 मिलियन टन से अधिक निर्यात का रहेगा अवसर
भारत ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में यूरोपीय संघ को लगभग 3 मिलियन टन इस्पात का निर्यात किया था। वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) और अन्य लागू श्रेणियों को ध्यान में रखते हुए भारतीय कंपनियों के पास यूरोपीय बाजार में 2.5 मिलियन टन से अधिक इस्पात निर्यात करने की गुंजाइश बनी रहेगी। इससे मौजूदा निर्यात पर पड़ने वाला असर सीमित होगा।
कार्बन अनुपालन और सीबीएएम (CBAM) पर प्रगति
मंत्रालय ने कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के मोर्चे पर भी प्रगति की जानकारी दी है। छह विदेशी संस्थानों ने भारतीय निर्यातकों के लिए कार्बन सत्यापनकर्ता (Carbon Verifiers) के रूप में काम करने हेतु आवेदन किया है। इसके अलावा, यूरोपीय संघ ने भारत को लिखित आश्वासन दिया है कि यदि किसी अन्य देश को CBAM के तहत ढील दी जाती है, तो वही लाभ भारत को भी दिया जाएगा।
