वाशिंगटन: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल के युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. इस बीच अमेरिका ने भारत को एक महत्वपूर्ण राहत देते हुए रूसी कच्चे तेल की खरीद पर 30 दिन की अस्थायी छूट दे दी है।
अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने बताया कि यह छूट खास तौर पर उन रूसी तेल कार्गो के लिए दी गई है जो पहले से समुद्र में मौजूद हैं और भारतीय रिफाइनर कंपनियों तक पहुंचने वाले हैं. उनका कहना है कि इस कदम का उद्देश्य वैश्विक तेल सप्लाई को बाधित होने से बचाना है।
बेसेंट के मुताबिक, यह एक अल्पकालिक और कामचलाऊ उपाय है जिससे रूसी सरकार को कोई बड़ा आर्थिक फायदा नहीं होगा. यह केवल पहले से ट्रांजिट में मौजूद तेल के ट्रांजैक्शन को ही अनुमति देता है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका उम्मीद करता है कि भारत भविष्य में अमेरिकी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाएगा. उनके अनुसार, भारत अमेरिका का एक अहम रणनीतिक साझेदार है और यह कदम मिडिल ईस्ट संकट के कारण पैदा हुए दबाव को कम करने के लिए उठाया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मिडिल ईस्ट में संकट के चलते भारतीय रिफाइनर कंपनियां वैकल्पिक सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए तेजी से रूसी कच्चा तेल खरीद रही हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सरकारी रिफाइनर कंपनियां मार्च और अप्रैल की शुरुआत में डिलीवरी के लिए ट्रेडर्स से बातचीत कर रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिफाइनर कंपनियां अब तक लगभग 20 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल खरीद चुकी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल रूस का यूराल्स क्रूड ऑयल ब्रेंट क्रूड के मुकाबले 4 से 5 डॉलर प्रति बैरल प्रीमियम पर ऑफर किया जा रहा है, जो बाजार में सीमित उपलब्धता को दर्शाता है। फरवरी में यही कार्गो करीब 13 डॉलर प्रति बैरल के डिस्काउंट पर बिक रहे थे।
युद्ध शुरू होने से पहले 28 फरवरी को हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने इसी डिस्काउंटेड कीमत पर दो कार्गो खरीदे थे।
ट्रेडर्स का कहना है कि भारतीय रिफाइनर कंपनियां फिर से बाजार में सक्रिय हो गई हैं और इस समय कीमत से ज्यादा तेल की उपलब्धता एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
