UGC New Rules Controversy: किन 3 खामियों ने यूजीसी के नियमों को विवादों में ला दिया?

UGC New Rules Controversy: किन 3 खामियों ने यूजीसी के नियमों को विवादों में ला दिया?

UGC New Rules Controversy: जातीय भेदभाव को लेकर यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) द्वारा बनाए गए नए नियमों का देशभर में विरोध तेज हो गया है। खासतौर पर सवर्ण वर्ग के छात्र इन नियमों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। सोशल मीडिया से लेकर विश्वविद्यालय परिसरों तक इस मुद्दे पर तीखी बहस चल रही है, वहीं मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो गया है कि आखिर UGC के नए नियमों में क्या है, जिसे लेकर इतना बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

UGC ने हाल ही में Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 लागू किए हैं। इनका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकना बताया गया है, लेकिन विरोध करने वालों का आरोप है कि ये नियम भेदभाव खत्म करने के बजाय नया भेदभाव पैदा कर सकते हैं।

गलती नंबर 1: जातीय भेदभाव की परिभाषा को जरूरत से ज्यादा व्यापक बनाना

नए नियमों में जातीय भेदभाव की परिभाषा का दायरा काफी बढ़ा दिया गया है। इसके तहत जाति, धर्म, नस्ल, लिंग, जन्म स्थान और विकलांगता के आधार पर किसी भी तरह के पक्षपातपूर्ण या अनुचित व्यवहार को भेदभाव की श्रेणी में रखा गया है। विरोध करने वालों का कहना है कि इतनी व्यापक परिभाषा से नियमों के दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है और छोटी-छोटी बातों को भी भेदभाव बताकर शिकायत की जा सकती है।

गलती नंबर 2: OBC को भी नियमों के दायरे में शामिल करना

ड्राफ्ट नियमों में केवल SC/ST के खिलाफ भेदभाव की बात थी, लेकिन अंतिम नियमों में OBC वर्ग को भी शामिल कर लिया गया। अब OBC छात्रों के खिलाफ किसी भी कथित पक्षपात को भी जातिगत भेदभाव माना जाएगा। सवर्ण छात्रों का कहना है कि इससे नियम एकतरफा हो जाते हैं और उन पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। उनका सवाल है कि अगर OBC को संरक्षण मिल रहा है, तो सवर्णों के खिलाफ भेदभाव की शिकायतों का क्या प्रावधान है।

गलती नंबर 3: झूठी शिकायत पर सजा का प्रावधान हटाना

ड्राफ्ट में यह व्यवस्था थी कि अगर कोई छात्र जानबूझकर झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत करता है, तो उस पर आर्थिक दंड या निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, अंतिम नियमों में यह प्रावधान हटा दिया गया है। विरोध करने वालों का कहना है कि इससे झूठी शिकायतों को बढ़ावा मिलेगा और बिना ठोस सबूत के भी किसी छात्र या शिक्षक को फंसाया जा सकता है।

24×7 हेल्पलाइन और शिकायत व्यवस्था

नए नियमों के तहत हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में 24×7 हेल्पलाइन और Equal Opportunity Centre बनाना अनिवार्य किया गया है, जहां छात्र भेदभाव की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। लेकिन झूठी शिकायत पर कोई सजा तय न होने के कारण इसे लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

क्यों मचा इतना बवाल?

UGC का कहना है कि ये नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनाए गए हैं। आयोग के अनुसार, उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017-18 में जहां 173 शिकायतें दर्ज हुई थीं, वहीं 2023-24 में इनकी संख्या बढ़कर 378 हो गई, यानी 118 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि।

हालांकि, सवर्ण छात्रों और विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि भेदभाव रोकना जरूरी है, लेकिन नियम ऐसे होने चाहिए जिनसे किसी एक वर्ग के साथ अन्याय न हो। उनका आरोप है कि मौजूदा नियमों में खामियां हैं, जिनके चलते दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई है। फिलहाल नियम लागू हो चुके हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं और विश्वविद्यालयों में जारी प्रदर्शनों के बीच यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है।

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *