जयपुर के मेयर सुनील कुमार कोठारी ने स्वीकार किया है कि यूनेस्को विश्व धरोहर शहर की लगभग 33 प्रतिशत ऐतिहासिक हवेलियां अनधिकृत निर्माण, व्यावसायिक विस्तार और उपेक्षा के कारण नष्ट हो चुकी हैं। ईटीवी भारत के ‘मार्केड अनसेफ’ अभियान की दूसरी कड़ी में यह खुलासा किया गया है कि पुरानी हवेलियों के टूटने से शहर की अनमोल विरासत और निवासियों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
जयपुर में ऐतिहासिक हवेलियों पर मंडराता खतरा
जयपुर की विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है, इसके संरक्षण के लिए नियम हैं और इसकी रक्षा करने वाली नगर निगम प्रशासन भी मौजूद है। इसके बावजूद, ऐतिहासिक हवेलियों की जगह व्यावसायिक परिसर ले रहे हैं, सार्वजनिक बरामदों पर अतिक्रमण हो रहा है, और निवासियों को डर है कि पुरानी इमारतों के नीचे हो रहे बदलाव उनकी जान जोखिम में डाल सकते हैं।
जयपुर के मेयर सुनील कुमार कोठारी ने स्वीकार किया है कि निगम बाजार के बरामदों पर अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण को रोकने में विफल रहा है। कोठारी के अनुसार, जब जयपुर को विश्व धरोहर का दर्जा मिला था, तब वहां लगभग 1,200 ऐतिहासिक हवेलियां थीं, जिनमें से करीब 33 प्रतिशत अब नष्ट हो चुकी हैं। इनमें से कुछ को बाजारों और व्यावसायिक परिसरों के लिए गिरा दिया गया, जबकि अन्य सालों की उपेक्षा के बाद ढह गईं।
चौड़ा रास्ता की ‘पूजा घर’ हवेली का मामला
ईटीवी भारत के ‘मार्केड अनसेफ’ अभियान के दूसरे भाग में जयपुर के परकोटे (Walled City) की स्थिति पर ग्राउंड रिपोर्ट पेश की गई है। चौड़ा रास्ता स्थित पुरानी आवासीय हवेली ‘पूजा घर’ के बाहर से यह अन्य इमारतों जैसी ही दिखती है, लेकिन इसके भीतर चल रहे निर्माण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
स्थानीय निवासी ओम प्रकाश अग्रवाल का आरोप है कि दुकानों के बीच की दीवारों और खंभों को हटा दिया गया है तथा बेसमेंट के लिए गहरी खुदाई की गई है। उनका कहना है कि इस तरह के बदलाव से संकीर्ण गलियों में पुरानी इमारतों की नींव कमजोर हो रही है, जिससे आसपास की संपत्तियों को भी खतरा पैदा हो गया है।
