जामताड़ा की एक अदालत ने फर्जी बैंक अधिकारी बनकर साइबर ठगी करने वाले दो दोषियों को तीन-तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम अजय कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला साइबर थाना कांड संख्या 12/2018 की सुनवाई के बाद आया।
जामताड़ा की अदालत का बड़ा फैसला, दो साइबर ठगों को मिली जेल
झारखंड के जामताड़ा जिले में साइबर अपराध के खिलाफ अदालत ने एक बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। फर्जी बैंक अधिकारी बनकर आम लोगों के साथ वित्तीय धोखाधड़ी करने वाले दो आरोपियों को अदालत ने दोषी पाते हुए जेल की सजा सुनाई है।
भारत मंथन लाइव न्यूज को मिली जानकारी के अनुसार, जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम अजय कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने मामले की पूरी सुनवाई और गवाहों के बयानों के आधार पर कर्माटांड़ थाना क्षेत्र के पार टोल निवासी माथुर मंडल और मोहम्मद सलीम मियां को इस मामले में दोषी करार दिया।
विभिन्न धाराओं के तहत पाए गए दोषी, जुर्माना न देने पर बढ़ेगी सजा
न्यायालय ने दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 419 और 420 के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 66सी एवं 66डी के तहत दोषी पाया है। अदालत ने दोनों अपराधियों को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
इसके साथ ही, अदालत ने दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड (जुर्माना) भी लगाया है। अदालत ने अपने आदेश में यह भी पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि यदि दोषी जुर्माना राशि जमा नहीं करते हैं, तो ऐसी स्थिति में उन्हें एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास काटना होगा।
पलाश जंगल में छापेमारी के दौरान पकड़े गए थे अपराधी
यह पूरा मामला साइबर थाना कांड संख्या 12/2018 से जुड़ा हुआ है। घटना 6 अप्रैल 2018 की है, जब पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ लोग गांव के पास पलाश के जंगल में बैठकर साइबर अपराध की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। इस सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस टीम ने मौके पर छापेमारी की थी।
पुलिस को अपनी ओर आते देख दोनों आरोपी मौके से भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन सतर्क पुलिस बल ने घेराबंदी कर पीछा करते हुए दोनों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया था।
फर्जी सिम और चोरी के मोबाइल से करते थे ठगी
गिरफ्तारी के बाद तलाशी के दौरान अपराधियों के पास से विभिन्न कंपनियों के मोबाइल फोन और फर्जी सिम कार्ड बरामद किए गए थे। इस संबंध में तत्कालीन थाना प्रभारी द्वारा संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
पुलिस जांच में यह बात पूरी तरह साबित हुई कि ये आरोपी बैंक अधिकारी बनकर लोगों को फर्जी कॉल करते थे। इसके बाद वे आम लोगों को झांसे में लेकर उनके एटीएम कार्ड का 16 अंकों का नंबर और अन्य गोपनीय बैंकिंग विवरण हासिल कर लेते थे और खातों से पैसे उड़ा लेते थे। इस पूरे अपराध में चोरी के मोबाइल और फर्जी सिम कार्ड का सहारा लिया जाता था।
