नई दिल्ली में शुक्रवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) प्रशासन ने यौन उत्पीड़न के आरोपों में एक प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया। आंतरिक समिति (IC) की जांच रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाने के बाद कुलपति प्रोफेसर शांतिश्री डी. पंडित ने 11 छात्राओं की शिकायतों के आधार पर यह कड़ी कार्रवाई की।
जेएनयू आंतरिक समिति की जांच में दोषी पाए गए प्रोफेसर
नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के सामाजिक विज्ञान संस्थान (School of Social Sciences) के सामाजिक व्यवस्था अध्ययन केंद्र (Centre for the Study of Social Systems) के एक प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच पूरी होने के बाद प्रशासन ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति (Internal Committee) ने इस मामले की गहन जांच की और अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी। समिति की रिपोर्ट में प्रोफेसर पर लगे आरोपों को सही पाया गया और उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई थी।
कुलपति ने जारी किया आदेश, 11 छात्राओं ने दर्ज कराई थी शिकायत
विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति प्रोफेसर शांतिश्री डी. पंडित ने समिति की रिपोर्ट तथा मामले से जुड़े तथ्यों पर विचार करने के बाद प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का निर्णय लिया। कुलपति द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए और उपलब्ध तथ्यों व आंतरिक समिति की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद बर्खास्तगी की सजा दी गई है। इस कार्रवाई में सेवा नियमों और केंद्रीय सिविल सेवाएं (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियमों के नियम 11(ix) का हवाला दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि कुल 11 छात्राओं ने प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। छात्राओं ने आरोप लगाया था कि प्रोफेसर कक्षा में अनुचित टिप्पणियां करते थे, कार्यक्रमों में अनुचित व्यवहार करते थे और व्यक्तिगत मुलाकातों के दौरान अपने आधिकारिक आवास पर आने के लिए दबाव बनाते थे।
