नालंदा के बजरंगी कुमार ने रग्बी में बिहार को दिलाया गौरव, चाय बेचकर चलाते हैं परिवार

नालंदा के युवा रग्बी खिलाड़ी बजरंगी कुमार जो चाय और फास्ट-फूड बेचकर बिहार रग्बी टीम के चैंपियन बने।

नालंदा के 18 वर्षीय रग्बी खिलाड़ी बजरंगी कुमार ने हैदराबाद में आयोजित 11वीं जूनियर नेशनल रग्बी 7s चैंपियनशिप में महाराष्ट्र के खिलाफ बिहार की खिताबी जीत में शानदार प्रदर्शन किया। पिता के निधन के बाद महज 13 साल की उम्र से अपने परिवार के फास्ट-फूड और चाय के स्टॉल को संभालने वाले बजरंगी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देख रहे हैं।

जूनियर नेशनल रग्बी चैंपियनशिप में बिहार की जीत के नायक बने बजरंगी

हैदराबाद के जीएमसी बालयोगी एथलेटिक स्टेडियम (गाचीबोवली स्टेडियम) में 6 जुलाई से 11 जुलाई तक आयोजित 11वीं जूनियर नेशनल रग्बी 7s चैंपियनशिप के अंडर-18 बॉयज वर्ग में बिहार ने अपना दबदबा कायम रखा है। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, बिहार ने फाइनल मुकाबले में महाराष्ट्र को 38-5 के बड़े अंतर से हराकर अपने चैंपियनशिप खिताब की रक्षा की। बिहार की इस ऐतिहासिक और शानदार जीत में नालंदा के होनहार खिलाड़ी बजरंगी कुमार ने बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक भूमिका निभाई है।

अपनी इस बड़ी सफलता और प्रदर्शन के बारे में जानकारी साझा करते हुए बजरंगी ने बताया, “मैंने रग्बी अंडर-19 7s टूर्नामेंट में बिहार की टीम की तरफ से कुल छह मैच खेले। इन मैचों के दौरान मैंने अपनी टीम के लिए अकेले दो गोल दागे और महत्वपूर्ण 10 अंकों का योगदान दिया।”

विपरीत पारिवारिक परिस्थितियों के बीच संभाली घर की कमान

पिता के आकस्मिक निधन के बाद उठाया दुकान का जिम्मा

नालंदा मोड़ क्षेत्र के रहने वाले 18 वर्षीय बजरंगी अपने चार भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे हैं। कुछ वर्ष पहले उनके पिता मिश्री चौरसिया का दिल का दौरा पड़ने के कारण अचानक निधन हो गया था। बजरंगी ने बताया कि उनके पिता काफी अस्वस्थ थे और उन्हें इलाज के लिए पटना के एनएमचीएच (NMCH) में भर्ती कराया गया था। उनके इलाज पर परिवार की ओर से काफी पैसे खर्च किए गए, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। पिता के इस आकस्मिक निधन के बाद परिवार पर आए आर्थिक संकट के कारण बजरंगी को महज 13 वर्ष की अल्पायु में ही अपने परिवार के फास्ट-फूड स्टॉल की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी।

चाय और फास्ट-फूड बेचकर कर रहे हैं आजीविका का प्रबंध

विपरीत हालातों के आगे घुटने टेकने के बजाय बजरंगी आज सुबह के समय स्थानीय लोगों के लिए नाश्ता और चाय बेचते हैं, जबकि दोपहर 1 बजे से वह छोले भटूरे और कोल्ड ड्रिंक्स का स्टॉल लगाते हैं। इस कड़े परिश्रम और ईमानदारी से की जा रही मेहनत के जरिए वह रोजाना 2,000 से 3,000 रुपये तक की कमाई कर लेते हैं, जिससे उनके पूरे परिवार का भरण-पोषण और जीविका सुचारू रूप से चल रही है।

सेना भर्ती की चाहत से अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी बनने का सफर

बड़े भाई को देखकर मैदान में जगा खेल के प्रति प्रेम

एक समय पर भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का सपना देखने वाला यह युवा एथलीट अब चाय बेचकर आजीविका कमाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय रग्बी में भारत का प्रतिनिधित्व करने का एक बड़ा और गौरवशाली सपना अपनी आंखों में संजोए हुए है। बजरंगी ने साल 2019 में पहली बार इस खेल के बारे में जाना था। शुरुआत में उन्हें यह बिल्कुल नहीं पता था कि रग्बी की इस अंडाकार (ओवल-शेप) गेंद के साथ कैसे खेला जाता है। वह करीब दो से तीन महीने तक अपने बड़े भाई के साथ केवल अभ्यास मैदान पर जाते थे, जो पहले से रग्बी खेलते थे। धीरे-धीरे खेल को देखते हुए उनका लगाव इस खेल के प्रति गहरा होता गया और साल 2021 में उन्होंने नियमित रूप से रग्बी खेलना और सीखना शुरू कर दिया। आज वह अपनी दुकान और पढ़ाई को संभालने के साथ-साथ पूरे समर्पण के साथ इस खेल के लिए खुद को समर्पित कर रहे हैं।

राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण शिविरों से निखरी खेल प्रतिभा

बजरंगी की इस खेल यात्रा को सही दिशा देने में राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण शिविरों (कैंप्स) ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अप्रैल 2025 में बिहार के औरंगाबाद में आयोजित अपने पहले सीनियर रग्बी कैंप में हिस्सा लिया था। इसके बाद, जुलाई 2025 में राजधानी पटना में दूसरा अंडर-18 जूनियर रग्बी कैंप आयोजित हुआ। अपनी बेहतरीन प्रतिभा और खेल कौशल के दम पर बजरंगी का चयन हर स्तर पर होता गया, जिससे उनका खेल लगातार निखरता गया। नवंबर 2025 में उन्होंने दिल्ली में आयोजित अंडर-19 रग्बी कैंप में भाग लिया। इसके बाद, अप्रैल 2026 में वह बिहार के नवादा में आयोजित सीनियर रग्बी कैंप का हिस्सा बने और अंततः 4 जून 2026 को उन्होंने नवादा में ही आयोजित अंडर-18 जूनियर रग्बी कैंप में अपना विशेष प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया।

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *