श्रीनगर: SIR प्रक्रिया पर उमर अब्दुल्ला को सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद

श्रीनगर में मतदाता सूचियों के SIR मुद्दे पर बयान देते जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को उम्मीद जताई कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मामले में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप राज्य के मतदाताओं के नाम हटाए जाने से रोकेगा। उन्होंने श्रीनगर में कहा कि परिसीमन की तरह SIR का उद्देश्य भी एक विशेष राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाना है।

श्रीनगर में उमर अब्दुल्ला ने SIR प्रक्रिया पर जताई चिंता

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। श्रीनगर में एक इंडोर जिम्नास्टिक हॉल का उद्घाटन करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि देशव्यापी SIR का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर करना है और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में भी इसके जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जाएगी।

परिसीमन के अनुभवों का किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग पहले भी इस तरह के कदमों का शिकार बन चुके हैं और वे परिसीमन के प्रक्रियागत प्रभावों को नहीं भूले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन का मुख्य उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को लाभ पहुंचाना था और SIR प्रक्रिया में भी इसी तरह का प्रयास दोहराया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और फॉर्म 6 पर नजरें

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि फॉर्म 6 से जुड़े संशोधनों पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई से उन्हें काफी उम्मीदें हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि शीर्ष अदालत की कार्यवाही के बाद अधिकारियों के लिए जम्मू-कश्मीर के वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

निर्वाचन आयोग और फॉर्म 6 विवाद

भारत निर्वाचन आयोग ने दावा किया था कि SIR के तहत फॉर्म 6 घोषणा को शीर्ष अदालत से मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, आयोग ने उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह घोषणा पत्र वापस ले लिया है जहां SIR पूरा हो चुका है, जबकि जहां प्रक्रिया जारी है वहां इसे लागू रखा गया है। यह घोषणा पत्र पहली बार 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पेश किया गया था, जिसमें नए मतदाताओं से 2002-03 के SIR के आधार पर उनके माता-पिता या दादा-दादी के चुनावी लिंक की जानकारी मांगी गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स और सरकारी रुख पर टिप्पणी

निर्वाचन आयोग के भीतर मतभेदों से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स का जिक्र करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर प्रकाशित समाचार मनगढ़ंत होता, तो सरकार या संबंधित पक्ष उस पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराते। उन्होंने कहा कि चूंकि कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, इसलिए मीडिया रिपोर्ट्स में दी गई जानकारी को सही माना जाना चाहिए।

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *