रायपुर की ग्राम पंचायतों में लगेगा संपत्ति कर, सिंहदेव ने जताई नाराजगी

छत्तीसगढ़ रायपुर के ग्राम पंचायतों में संपत्ति कर लागू करने संबंधी आधिकारिक आदेश का विवरण

छत्तीसगढ़ के जनपद पंचायत भरतपुर ने सभी ग्राम पंचायत सचिवों को हर कर योग्य परिवार से 1200 रुपये वार्षिक (100 रुपये प्रतिमाह) भवन एवं मकान कर वसूलने का निर्देश जारी किया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे ग्रामीण जनता पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बताया है और आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है।

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में नया संपत्ति कर लागू करने के निर्देश

छत्तीसगढ़ की ग्राम पंचायतों में संपत्ति कर (भवन-मकान कर) लागू करने के आदेश के बाद एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। जनपद पंचायत भरतपुर द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, अब ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक कर योग्य परिवार से 1200 रुपये वार्षिक यानी 100 रुपये प्रतिमाह की दर से कर वसूला जाएगा।

इस फैसले पर पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय आम जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालेगा। उन्होंने राज्य सरकार से इस कर आदेश को अविलंब वापस लेने का आग्रह किया है।

16वें वित्त आयोग के तहत पोर्टल पर एंट्री अनिवार्य

जनपद पंचायत भरतपुर ने 1 जुलाई 2026 को सभी ग्राम पंचायत सचिवों को एक अंतिम स्मरण पत्र जारी किया था। इस पत्र में उल्लेख किया गया कि 16वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ‘समर्थ पंचायत पोर्टल’ और ‘ग्राम संपदा ऐप’ में संपत्ति कर से जुड़ी प्रक्रिया 24 घंटे के भीतर 100% पूरी की जाए।

टैक्स आधार तय करने के लिए राशन कार्डधारी परिवारों को मानक माना गया है। इसके तहत निम्नलिखित कदम उठाना अनिवार्य है:

  • करदाता प्रोफाइल तैयार करना
  • संपत्ति पंजी बनाए रखना
  • संपत्ति का मालिक से लिंक स्थापित करना
  • टैक्स की मांग (डिमांड) तैयार करना

लापरवाही पर वेतन रोकने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी

प्रशासनिक समीक्षा में पाया गया कि बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद अधिकांश ग्राम पंचायतों ने यह कार्य समय पर पूरा नहीं किया। इसके बाद जिला पंचायत सीईओ मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के निर्देशों के आधार पर कड़े रुख के साथ चेतावनी जारी की गई है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा में काम पूरा न करने वाले ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन आहरण रोक दिया जाएगा। इसके अलावा, दोषी कर्मचारियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के प्रावधानों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।

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