रांची धुर्वा में नाबालिक बच्ची का संदिग्ध मामला, पुलिस कर रही हर पहलू से जांच

रांची धुर्वा थाना क्षेत्र में नाबालिग बच्ची मामले की जांच करती पुलिस टीम।

रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र में एक नाबालिक बच्ची के कथित अपहरण और संदिग्ध घटनाक्रम का मामला सामने आया है। पुलिस ने दोनों नाबालिग बच्चियों को संरक्षण में लेकर पूछताछ शुरू की है। बच्ची के लगातार बदलते बयानों के कारण मामले की जांच संवेदनशील हो गई है।

रांची के धुर्वा में नाबालिक बच्ची का संदिग्ध मामला, पुलिस कर रही जांच

राजधानी रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र से एक नाबालिक बच्ची के कथित अपहरण और संदिग्ध घटनाक्रम का मामला सामने आया है। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों नाबालिक बच्चियों को संरक्षण में लेकर पूछताछ शुरू की। पुलिस के अनुसार, बच्ची बार-बार अपना बयान बदल रही है, जिससे मामले की जांच और अधिक संवेदनशील हो गई है।

प्रारंभिक पूछताछ में बच्ची ने क्या बताया

प्रारंभिक पूछताछ में बच्ची ने पुलिस को बताया कि वह स्मार्ट सिटी क्षेत्र में घूम रही थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात एक युवक से हुई, जिसने उसे अपनी गर्लफ्रेंड बनने के लिए कहा। बच्ची के अनुसार, उसने हामी भर दी और युवक की स्कूटी पर उसके साथ चली गई।

बच्ची ने आगे दावा किया कि युवक उसे एक स्थान पर ले गया, जहां उसने कुछ अन्य लड़कों को भी बुला लिया।

पूछताछ के दौरान बदल रहे हैं बयान

पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान बच्ची लगातार अपने बयान बदल रही है। अभी तक किसी भी आरोपी की पहचान या गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

बच्चियों के परिजनों को भी धुर्वा थाना बुलाकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि परिजनों के सामने बच्चियां अलग तरह का बयान दे रही हैं, जिससे आशंका है कि वे डरी-सहमी हुई हैं।

पुलिस सभी पहलुओं की कर रही जांच

जानकारी के अनुसार, नाबालिग बच्ची एक दिन पहले से घर से बाहर थी। हालांकि, पुलिस ने अभी तक अपहरण या किसी अन्य अपराध की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में बच्ची ने एक प्रकार का बयान दिया था, जबकि माता-पिता के सामने उसने दावा किया कि एक युवक उसके मुंह पर कपड़ा दबाकर उसे अपने साथ ले गया। इन विरोधाभासी बयानों को देखते हुए पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं

फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।


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