जनजाति सुरक्षा मंच ने उठाई तीन प्रमुख मांगें
रांची में जनजाति सुरक्षा मंच झारखंड ने आदिवासी समाज के अधिकारों और मूल संस्कृति की रक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना आंदोलन तेज कर दिया है। इसी क्रम में मंच के मीडिया प्रभारी सोमा उरांव ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को तीन सूत्रीय मांग पत्र सौंपा।
संगठन ने मांग पत्र के माध्यम से विभिन्न सामाजिक और नीतिगत विषयों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है।
डीलिस्टिंग बिल शीघ्र पारित करने की मांग
मंच की पहली और प्रमुख मांग डीलिस्टिंग बिल को जल्द पारित करने की है। संगठन का कहना है कि जो लोग आदिवासी समुदाय से होकर ईसाई या इस्लाम धर्म अपना चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति (एसटी) आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए।
मंच का दावा है कि इससे आदिवासी समाज के वास्तविक हक और प्रतिनिधित्व पर प्रभाव पड़ रहा है।
जाति प्रमाण पत्र नियमों में संशोधन की मांग
जनजाति सुरक्षा मंच ने झारखंड में जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में बदलाव की भी मांग की है। संगठन के अनुसार वर्ष 2013 के बाद लागू व्यवस्था में केवल पिता का नाम दर्ज होने के कारण कुछ मामलों में गलत तरीके से प्रमाण पत्र बनवाने की संभावना बनी हुई है।
मंच ने मांग की है कि भविष्य में जाति प्रमाण पत्र में पिता के नाम के साथ पति का नाम भी अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए, ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी और आरक्षण के दुरुपयोग को रोका जा सके।
समान जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने की मांग
मांग पत्र में तीसरी प्रमुख मांग देशभर में समान जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने की है। संगठन का कहना है कि बढ़ती जनसंख्या, बेरोजगारी और संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होने वाला कानून बनाया जाना चाहिए।
मंच ने सुझाव दिया है कि ऐसे कानून में प्रति परिवार अधिकतम दो बच्चों की सीमा निर्धारित की जाए।
आंदोलन की चेतावनी
मीडिया प्रभारी सोमा उरांव ने कहा कि यदि संगठन की मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आदिवासी समाज आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा।
उन्होंने कहा कि मंच अपनी मांगों को लेकर आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाता रहेगा।
