राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने रांची के कांके प्रखंड के नगड़ी में 222 एकड़ उपजाऊ भूमि पर प्रस्तावित रिम्स-2 के निर्माण कार्य पर अगली सुनवाई तक पूर्ण रोक लगा दी है। आयोग ने झारखंड सरकार को स्थानीय रैयतों की आजीविका बचाने के लिए किसी बंजर या परती भूमि पर अस्पताल बनाने का सुझाव दिया है।
रांची के नगड़ी में प्रस्तावित रिम्स-2 निर्माण पर रोक, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का कड़ा रुख
रांची: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने रांची के कांके प्रखंड के नगड़ी में 222 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित रिम्स-2 (RIMS-2) के निर्माण कार्य पर अगली सुनवाई तक पूरी तरह से रोक लगा दी है। सोमवार को सर्कुलर रोड स्थित न्यू सर्किट हाउस में आयोजित एक महत्वपूर्ण जनसुनवाई के दौरान आयोग ने यह कड़ा फैसला सुनाया।
इस जनसुनवाई की अध्यक्षता राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने की। जनसुनवाई के दौरान कुल 15 गंभीर मामलों पर विचार किया गया, जिसमें नगड़ी में रिम्स-2 के लिए अधिगृहित की जा रही रैयती भूमि का मुद्दा सबसे प्रमुख रहा। राज्य की इस बड़ी प्रशासनिक व जनजातीय विकास से जुड़ी खबर की विस्तृत रिपोर्ट आप भारत मंथन लाइव न्यूज़ (Bharat Manthan Live News) पर पढ़ रहे हैं।
अधिकारियों को एक महीने में मुआवजा रिपोर्ट सौंपने के सख्त निर्देश
रिम्स-2 मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने आयोग के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत किया। वहीं, संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों ने अधिगृहित की गई 222 एकड़ भूमि और उससे जुड़े रैयतों (जमीन मालिकों) की आधिकारिक सूची आयोग को सौंपी।
सुनवाई के दौरान जब अधिकारियों से मुआवजे के संबंध में सवाल किया गया, तो वे यह बताने में असमर्थ रहे कि अब तक कितने रैयतों को मुआवजे का सफल भुगतान किया जा चुका है। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए NCST ने विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि वे एक महीने के भीतर मुआवजे के भुगतान की विस्तृत रिपोर्ट आयोग को सौंपें। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि जब तक यह मामला आयोग में लंबित है, तब तक प्रभावित स्थल पर कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जाएगा।
उपजाऊ भूमि के बजाय बंजर जमीन तलाशने और सुदूर क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा सुधारने की सलाह
आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि जिस भूमि पर राज्य सरकार रिम्स-2 बनाने की योजना बना रही है, वह बेहद उपजाऊ है और स्थानीय रैयतों की आजीविका का एकमात्र जरिया है। आयोग ने झारखंड सरकार को स्पष्ट सुझाव दिया है कि रिम्स-2 का निर्माण इस उपजाऊ कृषि भूमि के बजाय किसी बंजर या परती भूमि पर कराया जाना चाहिए।
डॉ. आशा लकड़ा ने यह भी रेखांकित किया कि रांची में पहले से ही रिम्स (RIMS) के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से उपलब्ध हैं। सरकार को सिमडेगा, खूंटी, गुमला, चैनपुर, डुमरी और सिंहभूम जैसे राज्य के सुदूर क्षेत्रों में डॉक्टरों और एंबुलेंस की भारी कमी को दूर करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि वहां के ग्रामीणों को इलाज के लिए भटकना न पड़े।
बोकारो पेड़ कटाई मामले में भी खनन कार्यों पर लगाई रोक
रिम्स-2 के अलावा, बोकारो वैध कारो पेड़ कटाई का मामला भी इस जनसुनवाई में प्रमुखता से आया। वन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा लाखों पेड़ काटे जाने की घटना पर आयोग ने स्वतः गहरा संज्ञान लिया।
डॉ. आशा लकड़ा ने बताया कि तत्कालीन अंचलाधिकारी ने भी इस प्रशासनिक कार्रवाई को गलत माना था। आयोग ने निर्देश दिया है कि जब तक इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित क्षेत्र में खनन से जुड़े सभी कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक रहेगी।
