रांची सदर अस्पताल को राज्य स्तरीय टेली एसएनसीयू और ई-संजीवनी हब सेंटर के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने इस संबंध में एक सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
रांची सदर अस्पताल से सुदूर क्षेत्रों को मिलेगी विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा
झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में डिजिटल तकनीक के माध्यम से एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार ने विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए रांची सदर अस्पताल को राज्य स्तरीय टेली एसएनसीयू (Tele-SNCU) और ई-संजीवनी हब सेंटर के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने रांची के सिविल सर्जन से एक सप्ताह के भीतर इस परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा है। विभाग का मुख्य उद्देश्य आधुनिक डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से ग्रामीण और सुदूरवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श आसानी से उपलब्ध कराना है।
टेली रेडियोलॉजी और टेली आईसीयू हब की सफलता के बाद विस्तार
डीएस डॉ बिमलेश सिंह ने बताया कि सदर अस्पताल रांची में पहले से संचालित टेली रेडियोलॉजी और टेली आईसीयू हब की सफलता को देखते हुए सरकार ने यह नया कदम उठाया है। अब नवजात शिशुओं की गहन चिकित्सा सेवाओं और ऑनलाइन स्वास्थ्य परामर्श को भी डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने का निर्णय लिया गया है।
टेली एसएनसीयू हब के रूप में विकसित होने के बाद राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित सभी एसएनसीयू (SNCU) इकाइयों को सीधे रांची सदर अस्पताल के डिजिटल नेटवर्क से जोड़ दिया जाएगा।
नवजात शिशुओं की ऑनलाइन निगरानी और ई-संजीवनी परामर्श
इस नई डिजिटल व्यवस्था के तहत गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं की निगरानी विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा ऑनलाइन माध्यम से की जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को तत्काल चिकित्सकीय सलाह उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे समय पर बच्चों का इलाज सुनिश्चित हो सकेगा।
इसके साथ ही ई-संजीवनी हब के माध्यम से सामान्य मरीज भी अपने घर या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से ही विशेषज्ञ डॉक्टरों से ऑनलाइन परामर्श प्राप्त कर सकेंगे। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, इस डिजिटल हब के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को बड़े डॉक्टरों से परामर्श के लिए राजधानी की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
