उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी की उस याचिका पर सुनवाई स्वीकार करते हुए नोटिस जारी किया, जिसमें केरल उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है। यह मामला वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में केरल के त्रिशूर निर्वाचन क्षेत्र से उनके चुनाव को दी गई चुनौती से संबंधित है।
सुप्रीम कोर्ट ने बिनॉय ए.एस. को जारी किया नोटिस
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने त्रिशूर निवासी और ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन के नेता बिनॉय ए.एस. को नोटिस जारी किया है।
बिनॉय ए.एस. ने ही केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी के चुनाव के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
केरल उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती
केरल से भारतीय जनता पार्टी के एकमात्र सांसद सुरेश गोपी ने उच्च न्यायालय के 1 अप्रैल के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने बिनॉय की चुनाव याचिका को विचारयोग्य माना था।
इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने पर्यटन और पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी को मुकदमे का सामना करने का निर्देश दिया था।
याचिका की विचारणीयता पर उठा सवाल
त्रिशूर के सांसद सुरेश गोपी ने तर्क दिया था कि यह चुनाव याचिका सुनवाई के योग्य नहीं है। हालांकि, उच्च न्यायालय ने उनकी इस अपील को खारिज कर दिया था।
उच्च न्यायालय का रुख था कि याचिका में लगाए गए आरोपों की न्यायिक जांच और सुनवाई आवश्यक है।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत आरोप
बिनॉय ए.एस. ने अपनी मूल याचिका में आरोप लगाया है कि सुरेश गोपी, उनके चुनाव एजेंट और सहयोगियों ने भ्रष्ट आचरण किया।
यह आरोप जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 के तहत लगाए गए हैं, जिस पर अब कानूनी प्रक्रिया जारी है।
