केंद्र सरकार ने देश के चार प्रमुख महानगरों—दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में जमीन धंसने (Land Subsidence) की समस्या के अध्ययन के लिए चार सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन किया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों के बाद केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) द्वारा गठित यह समिति कारणों की जांच कर उपचारात्मक उपाय सुझाएगी।
महानगरों में जमीन धंसने की समस्या पर केंद्र सरकार का बड़ा कदम
देश के प्रमुख महानगरों में लगातार सामने आ रही जमीन धंसने की गंभीर समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक संयुक्त समिति का गठन किया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों का पालन करते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) ने यह चार सदस्यीय विशेषज्ञ पैनल बनाया है। यह पैनल दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में जमीन धंसने की घटनाओं की जांच कर अपनी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपेगा।
समिति में शामिल विशेषज्ञ और भूमिकाएं
एनजीटी को दी गई हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस समिति में चार प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। सीजीडब्ल्यूए के वैज्ञानिक ‘डी’ आलोक कुमार सिन्हा इस समिति के संयोजक (कोऑर्डिनेटर) होंगे। समिति में आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) से मोनीस खान, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से ऋत्विक मजूमदार और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) से पी.के. गजभिए को प्रतिनिधि के रूप में शामिल किया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन के बाद एनजीटी ने लिया था संज्ञान
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने 29 मई को इस संबंध में आदेश जारी किया था। इससे पहले, ट्रिब्यूनल ने एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन पर आधारित मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया था। इस अध्ययन में 2015 से 2023 तक के उपग्रह अवलोकन (सैटलाइट ऑब्जर्वेशन) के हवाले से बताया गया था कि दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई के लगभग 878 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में जमीन धंसने की समस्या दर्ज की गई है। अध्ययन के मुताबिक, अत्यधिक भूजल दोहन (ग्राउंडवाटर डिप्लेशन) जमीन धंसने का एक मुख्य कारक है।
उपलब्ध वैज्ञानिक डेटा के आधार पर तैयार होगी रिपोर्ट
सीजीडब्ल्यूए ने बताया कि यह संयुक्त समिति उपलब्ध हाइड्रोजियोलॉजिकल, जियोटेक्निकल, रिमोट-सेंसिंग, भूजल स्तर, शहरीकरण और भूमि-उपयोग से जुड़ी जानकारियों की गहन समीक्षा करेगी। समिति विभिन्न मंत्रालयों और वैज्ञानिक संगठनों के डेटा का समन्वय कर उपचारात्मक सुझावों वाली रिपोर्ट तैयार करेगी। हालांकि, रिपोर्ट जमा करने के लिए कोई निश्चित अंतिम समय-सीमा अभी निर्दिष्ट नहीं की गई है।
