कानपुर में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) को कैंसर रिसर्च हब के रूप में विकसित किया जाएगा। 31 मार्च 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार, यह शोध प्रोफेसर बुशरा अतीक के नेतृत्व में बायोसाइंस और बायोइंजीनियरिंग विभाग द्वारा किया जाएगा, जिसमें कैंसर के कारणों और उपचार पर काम होगा।
कानपुर में IIT कैंसर रिसर्च हब के रूप में विकसित
कानपुर: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर को कैंसर पर शोध के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यह पहल ड्रोन टेक्नोलॉजी, क्वांटम टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में की जा रही है।
नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (NRF) की एक पहल के तहत IIT कानपुर को इस कैंसर रिसर्च हब के रूप में चुना गया है। इस पहल में देश के अन्य संस्थान भी शामिल हैं।
प्रोफेसर बुशरा अतीक के नेतृत्व में होगा शोध
कैंसर पर यह शोध बायोसाइंस और बायोइंजीनियरिंग विभाग द्वारा प्रोफेसर बुशरा अतीक के नेतृत्व में किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस शोध में मुंह, गॉलब्लैडर और प्रोस्टेट कैंसर सहित विभिन्न प्रकार के कैंसर के कारणों का अध्ययन किया जाएगा।
AI और मशीन लर्निंग का उपयोग
प्रोफेसर अतीक ने कहा कि शोध के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग जैसी तकनीकों का उपयोग कर मरीजों के बेहतर उपचार की दिशा में काम किया जाएगा।
जीनोम सीक्वेंसिंग पर रहेगा फोकस
उन्होंने बताया कि कैंसर को आनुवंशिक बीमारी माना जाता है, लेकिन देश में केवल 4 प्रतिशत मामले ही वंशानुगत होते हैं। हाल के वर्षों में कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है।
प्रोफेसर अतीक ने जीनोम सीक्वेंसिंग की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि यदि कोशिकाओं में होने वाले बदलावों की जानकारी समय पर मिल जाए, तो उपचार को बेहतर बनाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जीनोम सीक्वेंसिंग एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जहां अभी और अधिक काम करने की आवश्यकता है और मरीजों से संबंधित डेटा एकत्र करना उपचार में मददगार हो सकता है।
हेल्थ टेक्नोलॉजी में IIT की पहल
IIT कानपुर स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीकी नवाचार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और मानसिक स्वास्थ्य पहलों को बढ़ावा देने में सक्रिय रहा है।
संस्थान ने AI आधारित हेल्थकेयर सॉल्यूशंस, डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म और डिजिटल हेल्थ स्टैक के विकास जैसे कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
