रांची नगर निगम में भवन नक्शा स्वीकृति के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि भवनों के नक्शे पास करने का महत्वपूर्ण कार्य प्रतिनियुक्ति पर आए कार्यपालक अभियंताओं के बजाय नियमित रूप से तैनात योग्य असिस्टेंट टाउन प्लानर से ही कराया जाना चाहिए।
रांची नगर निगम में नक्शा पास करने की प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की सख्ती
झारखंड उच्च न्यायालय ने रांची नगर निगम (RMC) में भवन नक्शा स्वीकृति की मौजूदा व्यवस्था में सुधार लाने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि शहर में भवनों के नक्शे स्वीकृत करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को डेप्यूटेशन (प्रतिनियुक्ति) पर आए कार्यपालक अभियंताओं (EE) को सौंपने के बजाय केवल नियमित रूप से पदस्थापित असिस्टेंट टाउन प्लानर से ही कराया जाना चाहिए।
यह महत्वपूर्ण टिप्पणी न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने भवन नक्शा स्वीकृति प्रक्रिया से जुड़ी एक अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान की। अदालत का मानना है कि असिस्टेंट टाउन प्लानर इस तकनीकी कार्य के लिए ज्यादा योग्य होते हैं, क्योंकि उन्होंने नगर नियोजन और संबंधित विषयों में विशेष प्रशिक्षण और पढ़ाई की है।
तकनीकी कार्यों में विशेषज्ञ अधिकारियों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण
अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि भवन नक्शा पास करने जैसे अत्यधिक तकनीकी कार्यों में विशेषज्ञता रखने वाले अधिकारियों की भूमिका बेहद अहम है। इसके साथ ही खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे विषय से संबंधित एक लंबित अपील (संख्या 181/2025) का परिणाम वर्तमान मामले की सुनवाई पर सीधा असर डाल सकता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची नगर निगम के नगर आयुक्त खुद अदालत में सशरीर उपस्थित हुए। उन्होंने खंडपीठ से विनम्र आग्रह किया कि चूंकि इस मामले से जुड़ी मुख्य अपील पर 16 जून को सुनवाई तय की गई है, इसलिए तब तक इसके अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा की जाए। कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार और नगर निगम को अतिरिक्त समय प्रदान किया तथा अगली सुनवाई की तिथि 29 जून निर्धारित कर दी।
प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए बनेगी नई नियमावली
राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को आश्वस्त किया कि पूर्व में जारी आदेशों को लेकर जो भी भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, उसे अब पूरी तरह से स्पष्ट कर लिया गया है। उन्होंने अदालत को बताया कि सरकार इस तकनीकी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और केवल योग्य अधिकारियों की ही इस पद पर नियुक्ति सुनिश्चित करने के लिए एक नई नियमावली तैयार करने जा रही है।
भारत मंथन लाइव न्यूज को मिली जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट में चल रहा यह पूरा विवाद याचिकाकर्ता गौरव कुमार बेसरा द्वारा दायर की गई एक अवमानना याचिका से जुड़ा हुआ है। अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब रांची में शहरी विकास और निर्माण अनुमति की प्रक्रियाओं में बड़े सुधार होने की उम्मीद है।
