झारखंड की राजधानी रांची में 2021 के मुख्यमंत्री आवास घेराव मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने गोमिया के पूर्व विधायक लंबोदर महतो को आरोपमुक्त कर दिया है, जबकि आजसू पार्टी अध्यक्ष सुदेश महतो समेत पांच अन्य नेताओं पर आरोप कायम रखे हैं। यह मामला प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और सरकारी कार्य में बाधा डालने से जुड़ा है।
मामला: मुख्यमंत्री आवास घेराव और दर्ज प्राथमिकी
8 सितंबर 2021 को आजसू पार्टी ने आरक्षण की मांग को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास का घेराव किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़प में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। तत्कालीन अंचलाधिकारी विजय केरकेट्टा की शिकायत पर लालपुर थाना में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
इस मामले में सुदेश महतो, चंद्रप्रकाश चौधरी, लंबोदर महतो, रामचंद्र सहिस और शिवपूजन महतो समेत अन्य नेताओं के खिलाफ दंगा, सरकारी कार्य में बाधा और निषेधाज्ञा उल्लंघन जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया था। कानूनी प्रक्रिया के तहत, इन सभी नेताओं ने मार्च 2022 में एमपी-एमएलए कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था।
लंबोदर महतो को मिली राहत
23 अप्रैल को अदालत ने इस मामले में आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी की, जिसमें लंबोदर महतो को बड़ी राहत मिली है। उनके बचाव पक्ष ने विधानसभा का उपस्थिति रजिस्टर साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया, जिसमें यह दावा किया गया कि घटना के समय वे विधानसभा सत्र में उपस्थित थे। इस साक्ष्य के आधार पर अदालत ने उन्हें आरोपमुक्त कर दिया।
सुदेश महतो पर बरकरार हैं आरोप
लंबोदर महतो को मिली राहत के बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विवाद का मुख्य बिंदु यह है कि सुदेश महतो ने भी उसी दिन विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, लेकिन उन्हें इस मामले में राहत नहीं मिली है। इसके अतिरिक्त, घटना के दौरान ली गई कुछ तस्वीरों में लंबोदर महतो की कथित उपस्थिति का दावा भी किया जा रहा है, जिससे फैसले की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
वर्तमान में, सुदेश महतो और अन्य नेताओं पर आरोप बरकरार हैं। उच्च न्यायालय द्वारा दी गई जमानत की शर्तों के अनुसार, आरोपियों को घायल पुलिसकर्मियों को मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।
