जामताड़ा के इंदिरा चौक पर शनिवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और छात्र संगठन ने नीट परीक्षा पेपर लीक मामले और बढ़ती महंगाई के खिलाफ केंद्र सरकार के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
जामताड़ा में नीट पेपर लीक और महंगाई के खिलाफ विपक्ष का हल्ला बोल
जामताड़ा के इंदिरा चौक पर शनिवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और स्थानीय छात्र संगठनों ने मिलकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ एक विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। यह विरोध प्रदर्शन देश में हाल ही में हुए NEET परीक्षा पेपर लीक मामले और लगातार बढ़ रही महंगाई के खिलाफ दर्ज कराया गया।
प्रदर्शन के दौरान जेएमएम और छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन किया। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का आरोप
विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जेएमएम और छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि NEET पेपर लीक जैसी घटनाओं से देश के लाखों होनहार छात्रों का भविष्य पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। नेताओं ने कहा कि इस संवेदनशील परीक्षा प्रणाली में हुई गड़बड़ी ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसके साथ ही, प्रदर्शनकारियों ने आर्थिक मोर्चे पर भी सरकार को घेरा। नेताओं ने देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर भी केंद्र सरकार की नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना की।
मांगें पूरी न होने पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जेएमएम नेता नरेंद्र मुर्मू और अन्य उपस्थित नेताओं ने केंद्र सरकार को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि नीट परीक्षा मामले और देशव्यापी महंगाई का जल्द ही कोई ठोस और निष्पक्ष समाधान नहीं निकाला गया, तो इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
नेताओं ने रूपरेखा स्पष्ट करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में इस विरोध प्रदर्शन को जिला स्तर से उठाकर पूरे झारखंड में राज्यव्यापी स्तर पर फैलाया जाएगा।
इस बड़े राजनीतिक और छात्र प्रदर्शन में जामताड़ा के स्थानीय लोग, बड़ी संख्या में जेएमएम पार्टी के कार्यकर्ता और विभिन्न छात्र संगठनों के नेता मुख्य रूप से शामिल हुए और सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना सामूहिक विरोध प्रकट किया।
