पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने एक बड़ा चिकित्सा चमत्कार कर दिखाया है। जन्मजात हृदय रोग (congenital heart disease) से पीड़ित दो मासूम बच्चियों को जटिल सर्जरी और लगातार 110 घंटों तक एक्स्ट्रकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन (ECMO) सपोर्ट पर रखने के बाद डॉक्टरों ने सुरक्षित बचा लिया है।
कोलकाता के डॉक्टरों ने गंभीर रूप से बीमार दो बच्चियों को दिया नया जीवन, आधुनिक तकनीक बनी वरदान
कोलकाता के एक निजी अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञों ने असाधारण चिकित्सा कौशल का परिचय देते हुए जन्मजात हृदय विकार से जूझ रहे दो शिशुओं को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया है। जटिल ओपन-हार्ट सर्जरी के बाद जब दोनों बच्चियों का दिल सामान्य रूप से काम नहीं कर रहा था, तब उन्हें लगातार 110 घंटे तक ईसीएमओ (ECMO) यानी कृत्रिम फेफड़े और दिल की सपोर्ट प्रणाली पर रखकर नया जीवन दिया गया।
चिकित्सकीय टीम के अनुसार, इन दो बच्चियों (एक की उम्र आठ महीने और दूसरी की 10 महीने) की जान सर्जरी के तुरंत बाद बेहद गंभीर खतरे में पड़ गई थी। ऑपरेशन के बाद उनके दिलों ने स्वतः काम करना बंद कर दिया था। जब मानक उपचार और दवाएं बेअसर साबित हुईं, तो डॉक्टरों ने अंतिम जीवन रक्षक विकल्प के रूप में ईसीएमओ (ECMO) तकनीक का उपयोग करने का निर्णय लिया।
सर्जरी के बाद दोनों बच्चियों की हालत हो गई थी बेहद नाजुक
अस्पताल के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, 10 महीने की बच्ची रेचल को जब अस्पताल लाया गया था, तब वह गंभीर हृदय संबंधी जटिलताओं से जूझ रही थी। उसके मिट्रल वाल्व में गंभीर रिसाव (leak) था और दिल के ऊपरी दो कक्षों के बीच एक बड़ा छेद था। दवाओं से सुधार न होने पर डॉक्टरों ने सर्जरी की। ऑपरेशन तो सफल रहा, लेकिन जैसे ही उसे हार्ट-लंग मशीन से हटाने की कोशिश की गई, रेचल का दिल खुद से धड़कने और रक्त संचार करने में असमर्थ साबित हुआ।
ठीक ऐसा ही मामला दूसरी बच्ची, आठ महीने की स्वीटी के साथ भी हुआ। स्वीटी के दिल के ऊपरी और निचले कक्षों के बीच एक बड़ा छेद था, जिसके कारण उसके फेफड़ों में रक्त का दबाव (ब्लड प्रेशर) खतरनाक स्तर तक बढ़ गया था। उसकी भी सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई थी, लेकिन ऑपरेशन के बाद उसके दिल ने सामान्य रूप से काम करना शुरू नहीं किया और स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी।
