नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आरोपी को चार्जशीट के दस्तावेज देना अनिवार्य

नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने निष्पक्ष सुनवाई और चार्जशीट दस्तावेजों पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

नई दिल्ली में उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी आरोपी को चार्जशीट का हिस्सा रहे दस्तावेजों को प्राप्त करने से नहीं रोका जा सकता। न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए एस चंदूरकर की पीठ ने पूर्व रॉ अधिकारी वी के सिंह से जुड़े मामले में यह आदेश देकर निष्पक्ष सुनवाई को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार बताया।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार सर्वोपरि

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने देश की कानूनी व्यवस्था को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी भी आरोपी को उस आरोपपत्र (चार्जशीट) का हिस्सा बनाए गए दस्तावेजों को देखने या उनकी प्रतियां प्राप्त करने से वंचित नहीं किया जा सकता है। अदालत के अनुसार, आरोपी को इन कागजातों से दूर रखना संविधान के तहत उसे मिले ‘निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार’ का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

यह अहम आदेश न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए एस चंदूरकर की पीठ द्वारा जारी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट की इस पीठ ने यह फैसला पूर्व रॉ (RAW) अधिकारी और सेवानिवृत्त मेजर जनरल वी के सिंह से जुड़े एक पुराने मामले की सुनवाई के दौरान दिया। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार) का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पूर्व रॉ अधिकारी वीके सिंह मामले में आया न्यायालय का आदेश

यह पूरा कानूनी मामला साल 2007 का है, जब सेवानिवृत्त मेजर जनरल वी के सिंह के खिलाफ ‘शासकीय गोपनीयता अधिनियम, 1923’ (Official Secrets Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही थी। सीबीआई ने इन दस्तावेजों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से ‘‘अत्यंत गोपनीय’’ श्रेणी का बताया था।

जांच एजेंसी का तर्क था कि यदि इन दस्तावेजों की कॉपियां आरोपी को सौंपी गईं, तो ये दस्तावेज सार्वजनिक हो सकते हैं। इसी आधार पर सीबीआई ने आरोपी को चार्जशीट से जुड़े दस्तावेज देने से साफ इनकार कर दिया था, जिसे अब शीर्ष अदालत ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।

‘गोपनीयता’ के नाम पर अधिकारों का हनन नहीं: उच्चतम न्यायालय

सीबीआई की दलीलें पूरी तरह खारिज

उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की दलीलों को अस्वीकार करते हुए अपने लिखित आदेश में गोपनीयता की आड़ में दस्तावेज रोकने के प्रयास को गलत ठहराया। अदालत ने साफ किया कि न्याय की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सबसे जरूरी तत्व हैं।

न्याय और निष्पक्ष सुनवाई के हित में प्रकटीकरण अनिवार्य

पीठ ने अपने आदेश में बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह स्थापित कानून है कि आरोपी को चार्जशीट का हिस्सा बने दस्तावेजों से दूर नहीं रखा जा सकता, चाहे उसमें सामान्य डायरी के दस्तावेज ही क्यों न शामिल हों। अगर कोई दस्तावेज अभियोजन के मामले से संबंधित है, तो न्याय और निष्पक्ष सुनवाई के हित में उसका प्रकटीकरण अनिवार्य है। न्यायालय ने आगे सचेत करते हुए कहा कि ऐसे दस्तावेजों को छिपाकर रखने से आरोपी के पक्ष को गंभीर क्षति पहुंचती है।

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