झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में आरोपी राजेंद्र प्रसाद जायसवाल को रांची की एसीबी (ACB) विशेष अदालत से राहत नहीं मिली है। न्यायालय ने जांच एजेंसी द्वारा जब्त किए गए सिम कार्ड को रिलीज करने की मांग वाली याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। यह फैसला मामले की जारी जांच को देखते हुए लिया गया है।
रांची की एसीबी विशेष अदालत का बड़ा फैसला, आरोपी की याचिका निरस्त
झारखंड के चर्चित शराब घोटाला मामले में आरोपी बनाए गए छत्तीसगढ़ के व्यवसायी राजेंद्र प्रसाद जायसवाल को अदालत से बड़ा झटका लगा है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की विशेष अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी की उस याचिका को नामंजूर कर दिया है, जिसमें उन्होंने जांच एजेंसी द्वारा जब्त किए गए सिम कार्ड को वापस करने का अनुरोध किया था।
भारत मंथन लाइव न्यूज को मिली जानकारी के अनुसार, राजेंद्र प्रसाद जायसवाल छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख शराब कारोबारी हैं। वह मेसर्स वेलकम डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक एवं संचालक हैं। उन पर झारखंड राज्य में देशी शराब की आपूर्ति से जुड़े कथित घोटाले में मुख्य रूप से संलिप्त होने का गंभीर आरोप है।
निलंबित आईएएस और विभागीय अधिकारियों से साठगांठ का आरोप
जांच एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, राजेंद्र जायसवाल ने निलंबित आईएएस (IAS) अधिकारी विनय कुमार चौबे के करीबी सहयोगी सिद्धार्थ सिंघानिया के माध्यम से झारखंड राज्य में देशी शराब की आपूर्ति का बड़ा ठेका हासिल किया था। इस मामले में आरोप है कि उक्त ठेका प्राप्त करने के एवज में उत्पाद विभाग के कई उच्च अधिकारियों को मोटी कमीशन राशि का भुगतान किया गया था।
एसीबी की जांच में यह दावा भी किया गया है कि राज्य में जो देशी शराब आपूर्ति की गई थी, उसकी गुणवत्ता बेहद खराब थी। इससे आम जनता के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ किया गया। इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए जांच एजेंसी ने नवंबर 2025 में राजेंद्र प्रसाद जायसवाल को छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार किया था।
जांच की आवश्यकता को देखते हुए अदालत ने नहीं दी सिम कार्ड को मंजूरी
रांची की विशेष अदालत में मामले की नियमित सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष की ओर से यह दलील दी गई थी कि उनके जब्त किए गए सिम कार्ड को रिलीज कर दिया जाए। हालांकि, अभियोजन पक्ष और एसीबी की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की गहन जांच के लिए यह सामग्री आवश्यक है।
अदालत ने जांच की तात्कालिक आवश्यकता और साक्ष्यों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए आरोपी की इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया। विशेष अदालत के इस कड़े फैसले को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की आगे की जांच और साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल इस घोटाले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर एसीबी की कार्रवाई और साक्ष्य जुटाने का काम निरंतर जारी है।
