सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को एक जनहित याचिका दायर कर तमिलनाडु में सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार बनाने के लिए कथित तौर पर हॉर्स-ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) करने के आरोपों की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई है। यह याचिका तमिलनाडु के तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) महासचिव और एआईएडीएमके (AIADMK) के चार पूर्व विधायकों के खिलाफ दायर की गई है।
तमिलनाडु हॉर्स-ट्रेडिंग मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, सीबीआई जांच की गुहार
देश की शीर्ष अदालत में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की गई है, जिसमें तमिलनाडु में सत्तारूढ़ दल में शामिल हुए नेताओं के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने के निर्देश देने की मांग की गई है। यह याचिका एआईएडीएमके (AIADMK) के उन चार पूर्व विधायकों और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के महासचिव के खिलाफ लाई गई है, जिन्होंने हाल ही में अपने पदों से इस्तीफा देकर पाला बदला था।
भारत मंथन लाइव न्यूज को मिली जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता एम श्रीनिवासन की ओर से अधिवक्ता अचिंत्य तिवारी के माध्यम से यह याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य में सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार बनाने के लिए बहुमत साबित करने के उद्देश्य से अवैध रूप से हॉर्स-ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) की गतिविधियों को अंजाम दिया गया।
टीवीके महासचिव और चार पूर्व विधायकों पर केस दर्ज करने की मांग
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह सीबीआई (CBI) को प्रतिवादी संख्या 7 से 11 के खिलाफ मामला दर्ज करने का एक रिट आदेश या निर्देश जारी करे। इसमें टीवीके के महासचिव एन आनंद उर्फ बुस्सी एन आनंद और एआईएडीएमके के चार पूर्व विधायक शामिल हैं।
इन पूर्व विधायकों में के मरगथम कुमारवेल (मदुरंतकम विधानसभा क्षेत्र), एस जयकुमार (पेरुंदुरई), पी सत्यबामा (धारापुरम) और इसाक्की सुबैया (अंबासमुद्रम) के नाम दर्ज हैं। इन चारों ने बीते 25 और 26 मई को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था और टीवीके (TVK) की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। याचिका में इस पूरे घटनाक्रम की समयबद्ध जांच कराकर अंतिम रिपोर्ट अदालत में पेश करने की मांग की गई है।
हॉर्स-ट्रेडिंग रोकने के लिए अनुच्छेद 142 के तहत नियम बनाने की अपील
सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका में शीर्ष अदालत से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी पूर्ण शक्तियों (Plenary Power) का उपयोग करने का आग्रह किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि चुनाव के बाद होने वाली हॉर्स-ट्रेडिंग को रोकने के लिए विशिष्ट और कड़े नियम बनाए जाने की तत्काल आवश्यकता है।
यह नियम विशेष रूप से उन उम्मीदवारों और जनप्रतिनिधियों के लिए होने चाहिए जिन्हें या तो विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) द्वारा अयोग्य घोषित कर दिया गया है, या जिन्होंने बिना किसी वैध, ठोस और उचित कारण के अचानक विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
उपचुनाव लड़ने पर रोक लगाने की भी उठी मांग
इस कानूनी याचिका में अदालत से एक अंतरिम आदेश (Injunction) जारी करने का भी अनुरोध किया गया है। इसके तहत प्रतिवादी संख्या 8 से 11 (एआईएडीएमके के चारों पूर्व विधायकों) पर तब तक किसी भी उपचुनाव में उम्मीदवार के रूप में खड़े होने पर रोक लगाने की मांग की गई है, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस संबंध में नए नियम तैयार नहीं कर लिए जाते।
याचिका में स्पष्ट कहा गया है कि इन पूर्व विधायकों को आगामी उपचुनावों में न तो स्वतंत्र (निर्दलीय) रूप से और न ही किसी अन्य राजनीतिक दल के समर्थन से चुनाव लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए। इस मामले पर आने वाले दिनों में अदालत के रुख और रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
