जापान ने भारतीय आमों के आयात पर क्यों लगाई रोक?
भारत के आम निर्यातकों को बड़ा झटका देते हुए जापान ने भारतीय ताजा आमों के आयात पर रोक लगा दी है। जापानी क्वारंटीन अधिकारियों ने भारत के आम उपचार (ट्रीटमेंट) केंद्रों में कीट नियंत्रण और स्वच्छता प्रक्रियाओं में खामियां पाई हैं। इसके बाद जापान ने भारतीय आमों की खेप स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
हर वर्ष आम निर्यात सीजन शुरू होने से पहले जापान अपने क्वारंटीन अधिकारियों को भारत भेजता है। ये अधिकारी Vapour Heat Treatment (VHT) सुविधाओं का निरीक्षण करते हैं। VHT एक अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसमें आमों को नियंत्रित गर्म और नम हवा के संपर्क में रखकर कीटों को नष्ट किया जाता है।
मार्च 2026 में जापानी अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश के रहमानपुर स्थित उपचार केंद्रों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान फ्यूमिगेशन और डिसइंफेक्शन प्रक्रियाओं में कमियां सामने आईं। इसके बाद जापान की संबंधित एजेंसियों ने 25 मार्च 2026 के बाद जारी किए गए प्रमाणपत्रों वाले आमों के आयात पर रोक लगाने का निर्णय लिया।
फल मक्खी (Fruit Fly) बनी चिंता का कारण
इस विवाद के केंद्र में फल मक्खी (Fruit Fly) है, जिसे दुनिया के सबसे खतरनाक कृषि कीटों में गिना जाता है। यह कीट फलों के अंदर अंडे देता है और उसके लार्वा फल को भीतर से खराब कर देते हैं।
हालांकि इस बार किसी खेप में फल मक्खी मिलने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जापान को भारत की कीट-नियंत्रण प्रक्रिया के सही तरीके से पालन किए जाने पर संदेह है।
किन भारतीय आमों की किस्मों पर पड़ा असर?
जापान के इस फैसले से भारत की छह लोकप्रिय आम किस्में प्रभावित हुई हैं:
अल्फांसो (Alphonso)
महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में उगाया जाने वाला यह आम अपनी मिठास और सुगंध के लिए प्रसिद्ध है।
केसर (Kesar)
गुजरात का यह आम अपने केसरिया रंग और शहद जैसी मिठास के लिए जाना जाता है।
बंगनपल्ली (Banganapalli)
आंध्र प्रदेश की यह किस्म अपने बड़े आकार और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की क्षमता के लिए लोकप्रिय है।
लंगड़ा (Langra)
उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध लंगड़ा आम अपने अनोखे स्वाद और रेशारहित गूदे के लिए पसंद किया जाता है।
चौसा (Chausa)
देर से आने वाली यह किस्म अत्यधिक मीठे स्वाद के कारण बाजार में खास पहचान रखती है।
मलिका (Malika)
यह भी एक लेट-सीजन वैरायटी है, जो अपने बेहतरीन स्वाद और गुणवत्ता के लिए जानी जाती है।
निर्यातकों के लिए मुश्किल समय
जापान का यह फैसला ऐसे समय आया है जब अप्रैल से जून के बीच भारत का आम निर्यात अपने चरम पर होता है। निर्यातकों का कहना है कि इससे व्यापार को बड़ा नुकसान हो सकता है। हालांकि भारतीय पक्ष और जापानी अधिकारियों के बीच बातचीत जारी है और समाधान की उम्मीद जताई जा रही है।
20 साल बाद फिर लगा प्रतिबंध
यह दूसरा मौका है जब जापान ने भारतीय आमों के आयात पर रोक लगाई है। इससे पहले 1986 में फल मक्खी के खतरे को देखते हुए जापान ने भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगाया था। करीब 20 वर्षों तक यह प्रतिबंध जारी रहा और 2006 में वैज्ञानिक परीक्षणों एवं तकनीकी जांच के बाद इसे हटाया गया था।
अब 20 साल बाद एक बार फिर भारतीय आम जापानी बाजार से बाहर हो गए हैं, जिससे आम उत्पादकों और निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है।
