रांची के मोरहाबादी स्थित दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र में शनिवार को प्राकृतिक खेती और श्री अन्न (मिलेट्स) पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि स्वामी भावेशानंद ने कहा कि किसानों की तरक्की और कृषि विकास से ही साल 2047 तक भारत को विश्व गुरु बनाने का लक्ष्य पूरा होगा।
रांची के दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र में प्राकृतिक खेती और श्री अन्न पर कार्यशाला आयोजित
रांची: मोरहाबादी स्थित दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र में प्राकृतिक खेती और श्री अन्न (मिलेट्स) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन झारखंड भाजपा किसान मोर्चा के तत्वावधान में प्रदेश अध्यक्ष पवन साहू के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में स्वामी भावेशानंद और भाजपा के प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी शामिल हुए। इस दौरान प्रदेशभर से आए सैकड़ों किसानों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए स्वामी भावेशानंद ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। कृषि और किसानों की तरक्की के बिना देश की उन्नति की कल्पना करना बेमानी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कृषि और किसानों को लेकर काफी गंभीर है। प्रधानमंत्री ने 2047 तक भारत को विश्व गुरु बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसका रास्ता खेती और अन्नदाताओं से ही होकर गुजरता है।
रासायनिक खादों के अंधाधुंध उपयोग से घट रही मिट्टी की उर्वरा शक्ति
भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पवन साहू ने किसानों को रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रासायनिक खेती के कारण मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार घट रही है और किसानों की उत्पादन लागत बढ़ रही है। इसके साथ ही मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने किसानों से कम लागत में अधिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया।
श्री अन्न के स्वास्थ्य लाभ और जैविक खाद तैयार करने की विधि पर चर्चा
कार्यशाला में मौजूद डॉ. बिसाखा सिंह ने श्री अन्न के पोषण और स्वास्थ्य संबंधी महत्व पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि मड़ुवा सहित अन्य मोटे अनाज कैल्शियम, आयरन, फाइबर एवं अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। उन्होंने श्री अन्न से तैयार विभिन्न खाद्य उत्पादों के नियमित सेवन से होने वाले फायदों के बारे में भी किसानों को जागरूक किया।
वहीं डॉ. अजित कुमार सिंह ने प्राकृतिक खेती के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने गोमूत्र, गोबर, बेसन और गुड़ से तैयार होने वाले जैविक घोल व खाद के उपयोग की विधि तथा उसके लाभों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि इन प्राकृतिक संसाधनों से तैयार जैविक खाद मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने, फसल की गुणवत्ता सुधारने, उत्पादन लागत कम करने तथा पर्यावरण संरक्षण में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होती है। इस कार्यक्रम की पूरी रिपोर्ट भारत मंथन लाइव न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत की गई है।
