नई दिल्ली में मंगलवार को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के महासचिव एमए बेबी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति ने वाम मोर्चा के लिए अपने संगठन को मजबूत करने का अवसर दिया है। तीन दिवसीय केंद्रीय समिति की बैठक के बाद उन्होंने संसद के आगामी मानसून सत्र में राष्ट्रीय मुद्दों पर अभियान तेज करने की घोषणा की।
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विकल्प की तलाश में जनता
नई दिल्ली में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई(एम) की तीन दिवसीय केंद्रीय समिति की बैठक संपन्न होने के बाद मंगलवार को पार्टी महासचिव एमए बेबी ने पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की स्थिति इस समय बेहद नाजुक है और राज्य की जनता एक मजबूत राजनीतिक विकल्प की तलाश कर रही है। Bharat Manthan Live News की रिपोर्ट के अनुसार, महासचिव ने कहा कि बंगाल से मिल रही प्रतिक्रियाएं बेहद सकारात्मक हैं, जो वाम मोर्चे के लिए संगठनात्मक शक्ति को पुनर्जीवित करने का एक बड़ा अवसर है।
पार्टी की केंद्रीय समिति की यह महत्वपूर्ण बैठक 11 से 13 जुलाई तक नई दिल्ली में आयोजित की गई थी। इस बैठक में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान चुनाव अभियान के मुद्दों को उठाने के तरीके, प्रचार रणनीतियों के क्रियान्वयन और उम्मीदवारों के चयन में रही कमियों व खामियों की पहचान की गई।
संगठन में सुधार के लिए चलेगा सुधार अभियान
पार्टी महासचिव एमए बेबी ने जानकारी दी कि इन चिन्हित कमजोरियों को दूर करने के लिए सीपीआई(एम) जल्द ही एक राष्ट्रव्यापी सुधार (rectification) अभियान शुरू करेगी। इन सुधारात्मक कदमों को अंतिम रूप देने के लिए अगस्त के अंतिम सप्ताह में पश्चिम बंगाल राज्य समिति और सितंबर के दूसरे सप्ताह में केरल राज्य समिति की विस्तारित बैठकें आयोजित की जाएंगी।
संसद में छात्रों के विरोध प्रदर्शन को उठाएगी पार्टी
केंद्रीय समिति ने बैठक में कई राष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी चर्चा की। पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे छात्र प्रदर्शनों को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। सीपीआई(एम) ने आगामी 20 जुलाई को छात्रों द्वारा आयोजित किए जाने वाले ‘संसद मार्च’ के आह्वान का समर्थन किया है।
इसके साथ ही, एमए बेबी ने दिल्ली में भूख हड़ताल पर बैठे कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा:
“भाजपा नीत सरकार द्वारा मांगों को स्वीकार न करना और कोई कार्रवाई न करना अत्यंत निंदनीय है। यह सरकार के तानाशाही और युवा-विरोधी चरित्र का एक और स्पष्ट उदाहरण है।”
महासचिव ने स्पष्ट किया कि सीपीआई(एम) मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे को उठाने के लिए अन्य विपक्षी दलों से आग्रह करेगी और संसद में विपक्षी दलों की फ्लोर समन्वय बैठक के दौरान यह प्रस्ताव रखा जाएगा।
