छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में बुधवार को 49 लाख रुपये के इनामी आठ नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। बीजापुर पुलिस और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने वालों में पांच महिलाएं शामिल हैं। यह सभी माओवादी पड़ोसी राज्य झारखंड के विभिन्न इलाकों में सक्रिय थे।
बीजापुर में 8 खूंखार नक्सलियों का बड़ा आत्मसमर्पण
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान को बड़ी सफलता मिली है। बीजापुर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष 49 लाख रुपये के कुल इनामी आठ नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया।
सरकार द्वारा 31 मार्च को राज्य को नक्सलवाद से मुक्त घोषित करने के बाद छत्तीसगढ़ में माओवादियों का यह पहला बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण माना जा रहा है।
पुनर्वास नीति और विकास से हुए प्रभावित
बीजापुर के पुलिस अधीक्षक उमेश प्रसाद गुप्ता ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों में पांच महिला नक्सली भी शामिल हैं। एसपी के अनुसार, ये सभी नक्सली छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों के बढ़ते प्रभाव और क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों से प्रभावित होकर मुख्यधारा में शामिल हुए हैं।
माओवादी संगठन की हिंसक विचारधारा से मोहभंग और खोखली संगठनात्मक संरचना भी इनके आत्मसमर्पण का प्रमुख कारण बनी।
आत्मसमर्पण करने वाले प्रमुख नक्सलियों पर था भारी इनाम
अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले ये सभी सदस्य प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन से लंबे समय से जुड़े थे और पड़ोसी राज्य झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय थे। इनमें शामिल प्रमुख चेहरे हैं:
- 8-8 लाख के इनामी: अश्विन उर्फ लच्छू (30), रंगा उर्फ सोहन (30), और डोबा माडवी उर्फ राहत (25)।
- 5-5 लाख के इनामी: फगनी पोयम उर्फ रजनी (28), सूरज मुन्नी चंपिया (25), हिडमे कड़ती उर्फ रीता (27), बुधरी कुंजम उर्फ अनुषा (25), और सलमी चंपिया उर्फ जिलानी (20)।
आत्मसमर्पण करने वाले ये नक्सली मूल रूप से बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के निवासी हैं, जिन्हें शासन की नीति के तहत पुनर्वास सहायता प्रदान की जाएगी।
