चेन्नई में मद्रास उच्च न्यायालय ने पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी संपत कुमार की याचिका पर 9 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में धोनी के मानहानि मामले की गवाही को पूरी तरह से वीडियो रिकॉर्ड करने और निगरानी के लिए न्यायिक अधिकारी नियुक्त करने की मांग की गई है।
मद्रास उच्च न्यायालय ने एमएस धोनी से मांगा जवाब
मद्रास उच्च न्यायालय की न्यायाधीश गोविंदराजन थिलागावती ने 100 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे में पूर्व कप्तान एमएस धोनी को रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार की याचिकाओं का जवाब देने के लिए 9 अक्टूबर तक का समय दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई भी 9 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी है।
वीडियो रिकॉर्डिंग और न्यायिक निगरानी की मांग
रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी संपत कुमार द्वारा दायर याचिकाओं में मांग की गई है कि कोर्ट द्वारा नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर जयश्री की मौजूदगी में धोनी की गवाही की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए। इसके अतिरिक्त, इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति की जाए तथा वीडियो रिकॉर्डिंग की प्रतियां दोनों पक्षों को उपलब्ध कराई जाएं। याचिका में यह भी कहा गया है कि धोनी की प्रसिद्धि को देखते हुए उनकी गवाही किसी निजी स्थान या होटल के बजाय केवल अदालत परिसर या सरकारी भवन में ही दर्ज की जानी चाहिए।
2013 आईपीएल सट्टेबाजी विवाद से जुड़ा है मामला
यह विवाद 2013 के आईपीएल सत्र के दौरान सामने आए सट्टेबाजी मामले से जुड़ा है। एक निजी टीवी शो पर संपत कुमार ने धोनी पर सट्टेबाजी में शामिल होने का आरोप लगाया था। इसके बाद एमएस धोनी ने 2014 में मद्रास उच्च न्यायालय में 100 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया था। इससे पहले कोर्ट ने फरवरी में धोनी को मामले से जुड़े कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) के अनुवाद और प्रतिलेखन के लिए 10 लाख रुपये जमा कराने का आदेश दिया था।
