भुवनेश्वर में वैज्ञानिक सत्य तापस ने बनाया अनोखा कोकोनट म्यूजियम, ओडिशा में नारियल खेती को देंगे नया जीवन

भुवनेश्वर के चंदका में वैज्ञानिक सत्य तापस द्वारा स्थापित अनूठे कोकोनट म्यूजियम में प्रदर्शित नारियल की विभिन्न प्रजातियां।

विकास दास की रिपोर्ट के अनुसार, ‘कोकोनट मैन’ के नाम से मशहूर 42 वर्षीय वैज्ञानिक सत्य तापस ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के बाहरी इलाके चंदका में एक अनोखा ‘कोकोनट म्यूजियम’ स्थापित किया है। विदेश में एक आकर्षक करियर छोड़कर लौटे ढेंकनाल निवासी सत्य तापस का मुख्य उद्देश्य राज्य में नारियल की खेती को पुनर्जीवित करना और स्थानीय किसानों को प्रशिक्षित करना है।

भुवनेश्वर के चंदका में स्थापित हुआ अनोखा कोकोनट म्यूजियम

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के बाहरी इलाके चंदका में एक अनूठी और अनुकरणीय पहल देखने को मिली है। प्रसिद्ध वैज्ञानिक सत्य तापस ने यहाँ राज्य का पहला ‘कोकोनट म्यूजियम’ (नारियल संग्रहालय) स्थापित किया है। इस संग्रहालय में विशालकाय नारियल से लेकर छोटे द्वीपीय किस्मों और कई कम ज्ञात नारियल किस्मों को प्रदर्शित किया गया है।

‘कोकोनट मैन’ के नाम से लोकप्रिय 42 वर्षीय सत्य तापस मूल रूप से ओडिशा के ढेंकनाल जिले के रहने वाले हैं और वर्तमान में भुवनेश्वर में निवास करते हैं। जर्मनी में कई वर्षों तक एक सुरक्षित और आकर्षक करियर बनाने के बाद, उन्होंने कृषि क्षेत्र में अपने जुनून का पीछा करने के लिए विदेश की नौकरी छोड़ दी और ओडिशा वापस लौट आए।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से मिली संग्रहालय बनाने की प्रेरणा

सत्य तापस के अनुसार, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के संग्रहालयों के भ्रमण ने उनके मन पर एक गहरी छाप छोड़ी थी। उन्होंने महसूस किया कि संग्रहालय केवल वस्तुओं को संरक्षित करने का स्थान नहीं हैं, बल्कि वे शिक्षा और ज्ञान प्रसार के सशक्त केंद्र होते हैं।

इसी विचार से प्रेरित होकर उन्होंने भुवनेश्वर में नारियल समर्पित इस अनूठे संग्रहालय की नींव रखी। इस पहल के माध्यम से उनका उद्देश्य नारियल की दुर्लभ प्रजातियों, कृषि नमूनों और नारियल से बने विभिन्न उत्पादों को जनता के सामने प्रदर्शित करना है।

ओडिशा में नारियल खेती को पुनर्जीवित करने का संकल्प

विदेश से लौटने के बाद सत्य तापस का मुख्य ध्यान नारियल की खेती पर शोध करने और पूरे ओडिशा में किसानों को आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित करने पर केंद्रित है।

इस कोकोनट म्यूजियम के जरिए वे राज्य में घटते नारियल उत्पादन को एक नई दिशा देना चाहते हैं। उनका लक्ष्य स्थानीय किसानों को उन्नत किस्मों से जोड़ना और नारियल आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना है।

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