नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ‘सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद भारतीय निर्यातकों में गहरी चिंता व्याप्त हो गई है। शनिवार को निर्यातकों ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाता है, तो इससे भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में अनिश्चितता बढ़ेगी और निर्यात पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।
नई दिल्ली में अमेरिकी टैरिफ कानून से भारतीय निर्यातकों की बढ़ी चिंता
नई दिल्ली में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में हस्ताक्षरित नए कानून को लेकर भारतीय निर्यातकों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। यह नया कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को भारतीय सामानों पर 100 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। निर्यातकों के अनुसार, इस कदम से दोनों देशों के बीच स्वस्थ व्यापारिक संबंधों में अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया है, जो लागू होने पर भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।
सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट के तहत 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को ‘सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ (Sanctioning Russia and Iran Act) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस कानून का मुख्य उद्देश्य मॉस्को (रूस) और उसके शीर्ष ऊर्जा खरीदारों पर कड़े शुल्क लगाना है।
यह कानून लागू होने के बाद राष्ट्रपति को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है, जो रूस से कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के शीर्ष खरीदार हैं। भारत और चीन भी रूस से ऊर्जा आयात करने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं।
कानून के प्रभाव का विस्तृत आकलन शुल्क दरें जारी होने के बाद संभव
निर्यातकों का कहना है कि भारतीय निर्यात पर पड़ने वाले वास्तविक प्रभाव का सटीक आकलन तभी संभव होगा, जब वाशिंगटन (अमेरिका) द्वारा शुल्क दरों, प्रभावित उत्पादों की सूची और इसके कार्यान्वयन की समय-सीमा की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे माल की कीमतें और परिवहन लागत पहले से ही काफी बढ़ चुकी हैं, जिससे निर्यात क्षेत्र पर दोहरा दबाव बन रहा है।
भारतीय निर्यात संगठनों ने जताई भारी चिंता
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के अध्यक्ष एस. सी. रल्हन ने कहा कि निर्यातक इस नए कानून से बेहद चिंतित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका अत्यधिक उच्च टैरिफ लगाता है, तो इससे अमेरिका को होने वाला भारतीय निर्यात पूरी तरह ठप हो सकता है, क्योंकि कोई भी आयातक इतने उच्च स्तर का टैरिफ वहन नहीं कर सकता। उन्होंने आग्रह किया कि अमेरिका को नए शुल्कों पर निर्णय लेने से पहले इंजीनियरिंग क्षेत्र जैसे प्रमुख व्यापारिक पहलुओं पर विचार करना चाहिए।
वहीं मुंबई के प्रमुख निर्यातक और टेक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज के सीएमडी शरद सराफ ने कहा कि टैरिफ से भी अधिक व्यापारिक वातावरण में बनी अनिश्चितता नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देशों पर लगने वाले शुल्क को देखना होगा, क्योंकि वर्तमान अनिश्चितता के कारण कारोबारी भविष्य के फैसले नहीं ले पा रहे हैं।
