मानसून के पीछे हटने और तापमान में गिरावट के साथ देश के कई हिस्सों में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। दिल्ली-एनसीआर में भी हवा की गुणवत्ता में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
सर्दियों की शुरुआत के साथ बढ़ा प्रदूषण
मानसून की विदाई और तापमान में गिरावट के बीच देश के कई हिस्सों में वायु प्रदूषण विकराल रूप धारण करने लगा है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्य प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर काफी उच्च दर्ज किया गया है। दिल्ली-एनसीआर में भी लगातार 99 दिनों तक ‘ खराब’ श्रेणी से नीचे रहने के बाद अब वायु गुणवत्ता में तेजी से गिरावट आई है।
देश के विभिन्न शहरों में वायु गुणवत्ता की स्थिति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बड़ौत में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 339 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं, मेरठ में यह 318, गढ़मुक्तेश्वर/गजरोला में 298, बागपत में 270, हरियाणा के सोनीपत में 269 और गुजरात के महेसाणा में 233 दर्ज किया गया। मध्य प्रदेश के मंडीदीप में यह आंकड़ा 212 पर पहुंच गया। इसके विपरीत, मैंगलोर में AQI 50 और गंगटोक में 24 दर्ज किया गया, जो अपेक्षाकृत साफ हवा को दर्शाता है। मुंबई में AQI 196, दिल्ली में 188, कोलकाता में 164 और हैदराबाद में 154 दर्ज किया गया।
दिल्ली-एनसीआर में बदला हवा का मिजाज
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में 14 जुलाई से 20 अक्टूबर 2026 के बीच लगातार 99 दिनों तक AQI ‘खराब’ श्रेणी से नीचे रहा था, जो 2015 में औपचारिक AQI निगरानी शुरू होने के बाद से सबसे लंबी अवधि थी। हालांकि, इसके बाद हवा की गुणवत्ता में तेजी से गिरावट आई और दिल्ली में 21 अक्टूबर को AQI 245, 22 अक्टूबर को 223 और 23 अक्टूबर को 230 दर्ज किया गया। 24 अक्टूबर को तेज हवाओं के चलने से दोपहर तक औसत AQI सुधरकर 188 पर आ गया, जिससे शहर ‘मध्यम’ श्रेणी में आ गया,, हालांकि कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर अभी भी अधिक बना हुआ है।
