आरंग में 1.01 करोड़ का जमीन विवाद, नायब तहसीलदार पर रजिस्ट्री न करने का आरोप

आरंग में एक करोड़ रुपये के जमीन विवाद पर पत्रकार वार्ता करते शिकायतकर्ता कुलदीप पाण्डेय

रायपुर निवासी कुलदीप पाण्डेय ने आरंग क्षेत्र के भानसोज स्थित जमीन सौदे को लेकर पत्रकार वार्ता में गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित के अनुसार, नायब तहसीलदार, जनपद सदस्य और मांडले परिवार के अन्य सदस्यों को ₹1.01 करोड़ का पूरा भुगतान करने के बावजूद न तो जमीन की रजिस्ट्री की जा रही है और न ही राशि लौटाई जा रही है।

आरंग में 1.01 करोड़ रुपये के जमीन सौदे को लेकर बढ़ा विवाद

आरंग: छत्तीसगढ़ के आरंग क्षेत्र से एक करोड़ रुपये से अधिक के भू-खंड सौदे को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। रायपुर निवासी कुलदीप पाण्डेय ने प्रशासनिक और जनप्रतिनिधि पद पर आसीन व्यक्तियों समेत एक ही परिवार के सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

शिकायतकर्ता का दावा है कि जमीन का पूरा सौदा तय होने और पूर्ण भुगतान किए जाने के बावजूद विक्रेता पक्ष न तो जमीन की रजिस्ट्री कर रहा है और न ही उनके पैसे वापस लौटा रहा है।

1.01 करोड़ रुपये का पूरा भुगतान करने का दावा

कुलदीप पाण्डेय ने एक पत्रकार वार्ता आयोजित कर बताया कि वर्ष 2024 में उन्होंने भानसोज (आरंग) स्थित जमीन खरीदने के लिए राज आशीष माण्डले (नायब तहसीलदार), अमर आशीष माण्डले (जनपद सदस्य, आरंग), त्रिविहार आशीष माण्डले और अगरबाई माण्डले के साथ विधिवत इकरारनामा किया था।

सौदा तय होने के बाद उन्होंने कुल ₹1.01 करोड़ का भुगतान किया, जिसमें ₹88 लाख बैंक लेन-देन के माध्यम से और ₹13 लाख नकद दिए गए। इसका स्पष्ट उल्लेख एग्रीमेंट में भी दर्ज है।

सीमांकन और टालमटोल के बाद अतिरिक्त रकम की मांग

पीड़ित का आरोप है कि एग्रीमेंट के कुछ महीनों बाद अमर आशीष माण्डले ने सौदे को आगे न बढ़ाने की बात कही। जब जमा रकम वापस मांगी गई तो मना कर दिया गया।

कानूनी नोटिस भेजने पर सीमांकन के बाद रजिस्ट्री का आश्वासन दिया गया, लेकिन फसल और सीमांकन का बहाना बनाकर मामले को एक साल तक टाला जाता रहा। अब उनसे ₹30 से ₹40 लाख अतिरिक्त मांगे जा रहे हैं और विरोध करने पर जमीन किसी अन्य को बेचकर पैसे लौटाने की बात कही जा रही है।

एफआईआर दर्ज न होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल

जनपद सदस्य अमर आशीष माण्डले ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि खरीदार तय समय-सीमा में रजिस्ट्री कराने में विफल रहा, जिसके चलते अनुबंध की शर्तों के अनुसार कदम उठाए गए हैं।

दूसरी ओर, पीड़ित कुलदीप पाण्डेय का कहना है कि उन्होंने दो महीने पहले रायपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय और आरंग थाने में लिखित शिकायत दी थी, परंतु अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली पदों पर बैठे लोगों के दबाव में पुलिस कार्रवाई करने से बच रही है।

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *