वाशिंगटन: नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के चार अंतरिक्ष यात्री 50 साल बाद चंद्रमा की ऐतिहासिक यात्रा पूरी कर प्रशांत महासागर में सुरक्षित लौटे। यह मिशन दिसंबर 1972 के बाद पहली मानवयुक्त चंद्र उड़ान रहा, जिसने अंतरिक्ष अन्वेषण में नया अध्याय जोड़ा।
आर्टेमिस-2 मिशन की ऐतिहासिक सफलता
नासा का आर्टेमिस-2 मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की यात्रा कर सुरक्षित पृथ्वी पर लौटे। यह 50 वर्षों से अधिक समय बाद चंद्रमा तक पहुंचने वाली पहली मानवयुक्त उड़ान है।
अंतरिक्ष यात्री प्रशांत महासागर में सुरक्षित उतरे, जहां उनका स्वागत उत्साह और तालियों के बीच किया गया।
1972 के बाद पहली मानवयुक्त चंद्र यात्रा
इस मिशन में कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन शामिल थे। यह मिशन दिसंबर 1972 में हुए अपोलो 17 के बाद पहली बार मानवों को चंद्रमा तक लेकर गया।
उड़ान निदेशक रिक हेनफ्लिंग ने बताया कि सभी अंतरिक्ष यात्री स्वस्थ हैं और ह्यूस्टन लौटने के लिए तैयार हैं।
उन्नत तकनीक का सफल परीक्षण
आर्टेमिस-2 पहला मानवयुक्त मिशन था, जिसमें नासा के स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट और ओरियन क्रू मॉड्यूल का उपयोग किया गया। इस मिशन ने साबित किया कि यह तकनीक अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की कक्षा से बाहर भेजकर सुरक्षित वापस ला सकती है।
मिशन की दूरी और उपलब्धियां
मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने कुल 7,00,237 मील की दूरी तय की और अधिकतम गति 24,664 मील प्रति घंटा रही। इस यात्रा में उन्होंने चंद्रमा के उस हिस्से को भी देखा, जिसे पहले कभी किसी मानव ने नहीं देखा था।
इसके साथ ही टीम ने पूर्ण सूर्यग्रहण का भी अवलोकन किया।
अमित क्षत्रिय का बयान
नासा के भारतीय मूल के सहायक प्रशासक अमित क्षत्रिय ने कहा कि चंद्रमा तक जाने का मार्ग अब खुल चुका है, लेकिन आगे की चुनौतियां और भी बड़ी हैं।
उन्होंने बताया कि मिशन के दौरान सटीक दिशा निर्धारण एक डिग्री से भी कम कोण में किया गया, जो टीम के समन्वय और मेहनत का परिणाम है।
आगे आर्टेमिस-3 मिशन की तैयारी
नासा अब आर्टेमिस-3 मिशन की तैयारी कर रहा है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा पर मानव को उतारना और वहां स्थायी बस्ती की दिशा में काम करना है।
आर्टेमिस-2 से मिले अनुभवों का उपयोग आगामी मिशनों में किया जाएगा, जो भविष्य में मंगल ग्रह तक पहुंचने की योजना का हिस्सा हैं।
