ऑटोमोबाइल थोक बिक्री ने बनाया रिकॉर्ड, वित्त वर्ष 2026 में 2.83 करोड़ यूनिट्स की बिक्री

भारत में वित्त वर्ष 2026 के दौरान ऑटोमोबाइल थोक बिक्री में हुई रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि को दर्शाते नए वाहन।

भारत में ऑटोमोबाइल थोक बिक्री ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) में 2.82 करोड़ यूनिट्स का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.4 प्रतिशत अधिक है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने नई दिल्ली में बताया कि यात्री वाहन, वाणिज्यिक वाहन और दोपहिया सहित सभी श्रेणियों ने जीएसटी 2.0 और रेपो रेट में कटौती के चलते अब तक की सबसे अधिक बिक्री दर्ज की है।

भारतीय ऑटो उद्योग ने वित्त वर्ष 2026 में दर्ज की ऐतिहासिक वृद्धि

भारत मंथन लाइव न्यूज — भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग ने वित्त वर्ष 2025-26 को एक नई ऊंचाई पर समाप्त किया है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल घरेलू थोक बिक्री 2,82,65,519 यूनिट्स तक पहुंच गई है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 2,56,09,399 यूनिट्स था।

सियाम (SIAM) के अध्यक्ष शैलेश चंद्रा ने नई दिल्ली में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि सात साल के लंबे अंतराल के बाद यह पहली बार है जब यात्री वाहनों, वाणिज्यिक वाहनों और दोपहिया वाहनों सहित सभी श्रेणियों ने एक ही वित्तीय वर्ष में अपनी उच्चतम बिक्री दर्ज की है। इससे पहले ऐसा 2018-19 में हुआ था।

सभी श्रेणियों में दिखी जबरदस्त बढ़त

पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान ऑटो सेक्टर के विभिन्न खंडों में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई:

  • दोपहिया वाहन: इस श्रेणी में 10.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसकी कुल बिक्री 2,17,05,974 यूनिट्स रही। इसमें स्कूटरों की बिक्री में 18.5 प्रतिशत की भारी उछाल देखी गई।
  • यात्री वाहन (PV): घरेलू बाजार में यात्री वाहनों की बिक्री 7.9 प्रतिशत बढ़कर 46,43,439 यूनिट्स तक पहुंच गई।
  • वाणिज्यिक वाहन (CV): इस खंड ने 12.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की और कुल 10,79,871 यूनिट्स की बिक्री की।
  • तिपहिया वाहन: इस श्रेणी में 12.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 8,36,231 यूनिट्स की बिक्री हुई।

निर्यात और भविष्य की चुनौतियां

भारत से वाहनों का कुल निर्यात भी वित्त वर्ष 2026 में 24 प्रतिशत बढ़कर 66,47,685 यूनिट्स हो गया। हालांकि, भविष्य के दृष्टिकोण पर बोलते हुए शैलेश चंद्रा ने सकारात्मक रुख अपनाया, लेकिन साथ ही कुछ वैश्विक चुनौतियों के प्रति आगाह भी किया।

सियाम के अनुसार, यदि पश्चिम एशिया (Middle East) में युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो इसका असर आपूर्ति श्रृंखला, कच्चे तेल की कीमतों और माल ढुलाई दरों पर पड़ सकता है। मेक्सिको जैसे देशों में आयात शुल्क में वृद्धि और भू-राजनीतिक तनाव भारतीय ऑटो निर्यात के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं, जो कुल यात्री वाहन निर्यात का लगभग 20-22 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं।

इसके बावजूद, मजबूत आर्थिक बुनियादी ढांचे और जीएसटी 2.0 जैसे सुधारों के कारण उद्योग को वित्त वर्ष 2026-27 में भी स्थिर विकास की उम्मीद है।

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