: चेन्नई के सरकारी कील्पॉक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (KMC) के न्यूरोसर्जन ने ‘कील्पॉक कीहोल क्रेनियोटॉमी’ (KKC) नामक एक नई सर्जिकल तकनीक विकसित की है। प्रोफेसर कोडीस्वरन एम. के नेतृत्व में इस टीम ने ब्रेन हैमरेज और न्यूरोट्रॉमा के इलाज के लिए इस विशेष मिनी-ओपनिंग पद्धति का उपयोग किया है। अब तक 50 से अधिक मरीजों पर इसका सफल परीक्षण किया जा चुका है।
चेन्नई के डॉक्टरों ने विकसित की ब्रेन सर्जरी की नई तकनीक ‘KKC’
भारत मंथन लाइव न्यूज — चेन्नई के सरकारी कील्पॉक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के विशेषज्ञों ने एक नई न्यूरोसर्जिकल तकनीक पेश की है, जो ब्रेन हैमरेज के मामलों को सुरक्षित और अधिक प्रभावी बनाने का दावा करती है।
इस प्रक्रिया को ‘कील्पॉक कीहोल क्रेनियोटॉमी’ (KKC) नाम दिया गया है। इसका विवरण फरवरी 2026 में चिकित्सा पत्रिका ‘न्यूरोलॉजी इंडिया’ में प्रकाशित किया गया था। न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रोफेसर कोडीस्वरन एम. ने बताया कि यह नवाचार पारंपरिक एंडोस्कोपिक सर्जरी की तकनीकी सीमाओं को दूर करने के लिए बनाया गया है।
सटीक इलाज के लिए विशेष डिजाइन
अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, पारंपरिक ‘सिंगल-बर-होल’ सर्जरी में काम करने की जगह बहुत कम होती है, जिससे उपकरणों के आपस में टकराने का जोखिम रहता है।
KKC तकनीक इसे दो क्षेत्रों (Zones) में विभाजित कर हल करती है:
- ई-लैंडिंग ज़ोन (E-Landing Zone): एंडोस्कोप रखने के लिए एक निश्चित स्थान।
- ई-फ्लोइंग ज़ोन (E-Flowing Zone): उपकरणों की स्वतंत्र आवाजाही के लिए एक विस्तृत क्षेत्र।
यह विशेष ‘कीहोल’ आकार डॉक्टरों को मस्तिष्क के छिपे हुए हिस्सों तक पहुंचने और जमे हुए रक्त के थक्कों को पूरी तरह से हटाने में मदद करता है।
50 से अधिक सफल ऑपरेशन
प्रोफेसर कोडीस्वरन ने बताया कि यह पद्धति क्रोनिक सबड्यूरल हेमेटोमा (CSDH) के लिए अत्यंत प्रभावी है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें सिर की चोट के बाद मस्तिष्क की सतह पर धीरे-धीरे खून जमा होने लगता है, जिससे पक्षाघात (Paralysis), याददाश्त में कमी और सिरदर्द जैसे लक्षण पैदा होते हैं।
उन्होंने कहा, “हमने अब तक 50 से अधिक मरीजों पर सफलतापूर्वक KKC प्रक्रिया अपनाई है। चूंकि यह सर्जरी एंडोस्कोप के जरिए एक छोटे छेद से की जाती है, इसलिए मरीज का मस्तिष्क बहुत तेजी से रिकवर होता है।”
न्यूरोट्रॉमा उपचार में नया अध्याय
ब्रेन हैमरेज के अलावा, चेन्नई का यह मेडिकल कॉलेज इस तकनीक का उपयोग ब्रेन ट्यूमर, सिर की गंभीर चोटों और संक्रमण के इलाज के लिए भी कर रहा है। सर्जरी के बाद के स्कैन में मरीजों के स्वास्थ्य में बेहतर सुधार देखा गया है। टीम अब इस आधुनिक विधि का विस्तार अन्य न्यूरोएंडोस्कोपिक सर्जरी में करने की योजना बना रही है।
