झारखंड के पूर्व विधायक और झामुमो नेता कुणाल षाडंगी ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक पहुंचने की उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। रांची के इस युवा नेता ने बर्फबारी, कम ऑक्सीजन और अत्यधिक ठंड जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए अपना साहसिक अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया और युवाओं के लिए प्रेरणा पेश की।
झामुमो नेता कुणाल षाडंगी ने फतह किया एवरेस्ट बेस कैंप, साझा किए अनुभव
भारत मंथन लाइव न्यूज — झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता और पूर्व विधायक कुणाल षाडंगी ने माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक पहुंचकर एक बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धि दर्ज की है। रांची और राज्य के युवाओं के बीच अपनी सक्रियता के लिए जाने जाने वाले षाडंगी ने इस साहसिक यात्रा के दौरान धैर्य और मानसिक शक्ति का परिचय दिया।
कठिन परिस्थितियों और ऑक्सीजन की कमी के बीच अभियान
कुणाल षाडंगी ने इस यात्रा को मात्र एक ‘ट्रेक’ न मानकर इसे मानसिक और शारीरिक परीक्षा बताया। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यात्रा के दौरान उन्हें निम्नलिखित गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा:
- खतरनाक रास्ते: बर्फ से ढके फिसलन भरे और दुर्गम मार्ग।
- प्रतिकूल मौसम: तेज बर्फीली हवाएं और जमा देने वाली अत्यधिक ठंड।
- स्वास्थ्य चुनौतियां: ऊंचाई पर ऑक्सीजन की भारी कमी, जिससे सांस लेने में कठिनाई महसूस हुई।
उन्होंने बताया कि कई मौकों पर शरीर पूरी तरह थक चुका था, लेकिन उनके दृढ़ निश्चय ने उन्हें बेस कैंप तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया।
युवाओं के लिए प्रेरणा और संदेश
इस साहसिक यात्रा के बाद कुणाल षाडंगी ने रांची सहित पूरे राज्य के युवाओं को संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा उन्हें सिखाती है कि असली लड़ाई शरीर से ज्यादा मन की होती है।
“हर कदम पर मुश्किलें थीं, लेकिन हर चुनौती ने मुझे और मजबूत बनाया। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और संकल्प मजबूत हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती,” उन्होंने साझा किया। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे जीवन में नई चुनौतियों से डरने के बजाय उनका डटकर सामना करें।
पूर्व विधायक के इस सफल अभियान की जानकारी के बाद क्षेत्र में उनके समर्थकों और स्थानीय लोगों के बीच खुशी का माहौल है।
