बच्चों में टाइप 2 डायबिटीज बढ़ी, बदलती जीवनशैली बनी कारण

बच्चों में बढ़ती टाइप 2 डायबिटीज को दर्शाता ग्लूकोज मॉनिटर उपयोग करता बच्चा

नई दिल्ली में 20 अप्रैल 2026 को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार बच्चों और किशोरों में टाइप 2 डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शारीरिक गतिविधि की कमी, खराब खानपान और बदलती जीवनशैली इसके प्रमुख कारण हैं।

बच्चों में टाइप 2 डायबिटीज: बढ़ता स्वास्थ्य संकट

पहले जहां डायबिटीज को मुख्य रूप से वयस्कों की बीमारी माना जाता था, अब यह बच्चों और किशोरों में भी तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार यह एक गंभीर और चिंताजनक स्वास्थ्य प्रवृत्ति बन चुकी है।

भारत समेत कई देशों में बच्चों में टाइप 2 डायबिटीज के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है।

टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज में अंतर

विशेषज्ञों के अनुसार टाइप 1 डायबिटीज, जिसे जुवेनाइल डायबिटीज भी कहा जाता है, आमतौर पर बच्चों में होती है। इसमें शरीर की इम्यून प्रणाली इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देती है।

वहीं टाइप 2 डायबिटीज का संबंध जीवनशैली और आनुवंशिक कारणों से होता है, जिसमें मोटापा एक प्रमुख भूमिका निभाता है।

जीवनशैली में बदलाव बना मुख्य कारण

डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों की दिनचर्या में बड़े बदलाव इस बीमारी के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण हैं। पहले बच्चे अधिक समय बाहर खेलते थे, जबकि अब उनका अधिक समय मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर पर बीतता है।

फास्ट फूड, मीठे पेय और तैलीय भोजन का बढ़ता सेवन भी इस समस्या को बढ़ा रहा है। साथ ही शारीरिक गतिविधि की कमी और बढ़ता तनाव भी जोखिम बढ़ा रहे हैं।

इंसुलिन रेजिस्टेंस और स्वास्थ्य खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में अधिक वसा जमा होने से इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता, जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। यह स्थिति टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ाती है।

पेट के आसपास चर्बी और लीवर में फैट का जमा होना शुरुआती चेतावनी संकेत माने जाते हैं।

बच्चों में बढ़ता जोखिम

डॉक्टरों का कहना है कि जिन बच्चों के परिवार में डायबिटीज का इतिहास है या जिनका वजन तेजी से बढ़ रहा है, उन्हें विशेष सावधानी की जरूरत है। नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है।

बचाव के उपाय

विशेषज्ञों के अनुसार माता-पिता को बच्चों की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है।

  • चीनी, मिठाई और कोल्ड ड्रिंक का सेवन कम करें
  • फास्ट फूड और तैलीय भोजन सीमित करें
  • फल, सब्जियां और प्रोटीन युक्त आहार बढ़ाएं
  • बच्चों को रोज 30 मिनट से 1 घंटे तक शारीरिक गतिविधि कराएं

डॉक्टरों का मानना है कि शुरुआती उम्र से ही सही आदतें अपनाकर इस बढ़ती समस्या को रोका जा सकता है।

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *