विशेष रिपोर्ट: विवेक रंजन सिंह
अमेरिका में 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमले को लेकर सामने आई नई FBI सामग्री ने सऊदी नागरिकों, हमलावरों की मदद और अमेरिकी एजेंसियों की जांच पर फिर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 19 हमलावरों में 15 सऊदी नागरिक थे, जबकि FBI के पास कुछ महत्वपूर्ण वीडियो और दस्तावेज मौजूद थे।
9/11 हमले के 25 साल पूरे होने पर सामने आईं FBI फाइलें
11 सितंबर 2001 के अमेरिका में हुए आतंकी हमले को लेकर 25 साल बाद सामने आई FBI सामग्री ने जांच से जुड़े पुराने सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसी सप्ताह BBC ने ऐसे वीडियो सार्वजनिक किए, जो हमले के कुछ ही दिनों बाद से FBI के पास मौजूद थे।
हमले में 19 लोग शामिल थे, जिनमें 15 सऊदी नागरिक थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हमलावरों में कोई इराकी या अफगानी नागरिक नहीं था।
उमर अल बायमी और दो हमलावरों से जुड़ी जानकारी
रिपोर्ट में उमर अल बायमी का उल्लेख है, जो सऊदी नागरिक था और 1994 में कैलिफोर्निया आया था। कागजों के अनुसार, वह अंग्रेजी पढ़ने के लिए अमेरिका आया था और एक सऊदी एविएशन कंपनी से उसे वेतन मिलता था।
जनवरी 2000 में सऊदी नागरिक नवाफ और खालिद लॉस एंजेलिस पहुंचे। रिपोर्ट के अनुसार, यही दोनों बाद में उस विमान में सवार थे, जो 11 सितंबर को पेंटागन से टकराया था।
बायमी की उनसे लॉस एंजेलिस के एक रेस्टोरेंट में मुलाकात हुई। इसके बाद वह उन्हें सैन डिएगो ले गया, रहने के लिए घर दिलाने, किराया देने, बैंक खाता खुलवाने और पार्टी देने में मदद की।
ब्रिटेन में गिरफ्तारी और वीडियो टेप
हमले के 10 दिन बाद ब्रिटेन की पुलिस ने बायमी को बर्मिंघम में गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान हजारों कागज, तस्वीरें और करीब 80 वीडियो टेप मिले।
इनमें वाशिंगटन स्थित कैपिटल के सामने रिकॉर्ड किया गया वीडियो और एक नोटबुक का उल्लेख है। ट्रांसक्रिप्ट के मुताबिक, वीडियो में सुरक्षा पोस्ट और नजदीकी एयरपोर्ट दिखाए गए थे, जबकि नोटबुक में एक विमान का स्केच और पायलटों से जुड़े कोणों की गणना बताई गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, यह सामग्री 2001 में FBI तक पहुंची थी।
FBI और 9/11 आयोग को लेकर सवाल
दावा किया गया है कि FBI ने इन सामग्रियों की जानकारी 9/11 आयोग को नहीं दी और CIA को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई। 2021 में सामने आई FBI फाइलों का हवाला देते हुए बायमी को सऊदी इंटेलिजेंस से जोड़ने वाली जानकारी का उल्लेख किया गया है।
एक मेमो में एक स्रोत के अनुमान का भी जिक्र है, जिसमें बायमी के पहले से जानकारी होने की संभावना 50-50 बताई गई थी।
मई 2025 में एक डेमोक्रेट और एक रिपब्लिकन समेत दो अमेरिकी सीनेटरों ने FBI निदेशक को पत्र लिखकर कैपिटल वीडियो और स्केच को 9/11 आयोग से छिपाए जाने पर सवाल उठाए। उस पत्र का सार्वजनिक जवाब नहीं मिला और BBC के सवाल पर FBI ने “नो कमेंट्स” कहा।
CIA को दो हमलावरों की जानकारी होने का दावा
रिपोर्ट में कहा गया है कि CIA को जनवरी 2000 में जानकारी मिल गई थी कि हाजमी और महदर मलेशिया में अलकायदा की बैठक से निकलकर अमेरिका आ रहे थे।
इनमें से एक के पास अमेरिकी वीजा था और CIA के पास उसकी कॉपी भी थी। CIA ने अगस्त 2001 तक दोनों के नाम FBI और इमीग्रेशन की वॉचलिस्ट पर नहीं डाले।
9/11 आयोग ने इसे बड़ी चूक माना। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों एजेंसियों के पास दो हमलावरों के नाम की जानकारी थी, लेकिन यह जानकारी एक-दूसरे से साझा नहीं की गई।
28 पन्नों की रिपोर्ट और JASTA कानून
2002 की अमेरिकी कांग्रेस की जांच रिपोर्ट के 28 पन्नों को बुश प्रशासन ने सील कर दिया था। ट्रांसक्रिप्ट के मुताबिक, ये पन्ने 2016 में सार्वजनिक हुए और इनमें बायमी, सैन डिएगो तथा सऊदी दूतावास से पैसे से जुड़े शक का उल्लेख था।
इसी वर्ष अमेरिकी संसद ने JASTA कानून पारित किया, जिसके तहत 9/11 पीड़ित परिवारों को विदेशी सरकारों के खिलाफ मुकदमा करने का रास्ता मिला। तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कानून पर वीटो लगाया था, जिसे अमेरिकी संसद ने पलट दिया।
इराक और अफगानिस्तान को लेकर उठे सवाल
रिपोर्ट में 9/11 के बाद अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को भी सवालों के संदर्भ में रखा गया है। इराक में वे हथियार नहीं मिले जिनके आधार पर 2003 में हमला किया गया था और अमेरिका ने अपनी जांच में इसे माना।
अफगानिस्तान में 20 साल तक युद्ध चला। अगस्त 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी के दौरान तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया।
इसके विपरीत, सऊदी अरब के खिलाफ सैन्य कार्रवाई या प्रतिबंध नहीं लगाए गए।
सऊदी सरकार का पक्ष
सऊदी सरकार 25 वर्षों से 9/11 हमले में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार करती रही है। यह भी कहा गया है कि अलकायदा सऊदी सरकार का दुश्मन था।
बायमी के वकीलों की ओर से नोटबुक में बने स्केच को स्कूल के गणित से जुड़ा बताया गया और वीडियो को पर्यटक के शौक के रूप में पेश किया गया।
बायमी ने अदालत में कहा था कि उसने अपने दो हमवतन लोगों की मदद की थी और उसे उनके बारे में कोई संदेह नहीं था। 9/11 के मास्टरमाइंड के रूप में बताए गए खालिद शेख मोहम्मद ने भी कहा था कि अमेरिका में हमलावरों के लिए कोई मददगार इंतजार नहीं कर रहा था।
सऊदी सरकार के खिलाफ मुकदमे की स्थिति
अगस्त 2025 में न्यूयॉर्क के एक जज जॉर्ज ने माना कि परिवारों ने ऐसा उचित साक्ष्य प्रस्तुत किया है, जिससे बायमी और फहद को सऊदी सरकार द्वारा हमलावरों की सहायता के लिए भेजे जाने की संभावना पर मामला आगे बढ़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, मामले में एक ट्रिलियन डॉलर यानी $1 लाख करोड़ डॉलर का दावा है। हालांकि, ट्रायल 2027 से पहले शुरू नहीं होने की बात कही गई है। 2001 में अपने लोगों को खोने वाले परिवार 2027 में पहली बार अदालत में सऊदी अरब के सामने खड़े हो सकते हैं।
9/11 जांच पर अब भी सवाल
रिपोर्ट में 9/11 हमले से जुड़े कई सवाल उठाए गए हैं—FBI के पास मौजूद सामग्री 9/11 आयोग तक क्यों नहीं पहुंची, CIA और FBI के बीच जानकारी साझा क्यों नहीं हुई और सऊदी सरकार की कथित भूमिका से जुड़े मामले इतने लंबे समय तक क्यों चलते रहे।
