भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ बुधवार को एक देशव्यापी राजनीतिक अभियान की शुरुआत की है। पार्टी के महासचिव डी. राजा ने ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के सभी घटक दलों से नई दिल्ली में 1 सितंबर को आयोजित होने वाली “बदलाव जरूरी है रैली” में शामिल होने की अपील की है।
सीपीआई का केंद्र के खिलाफ राष्ट्रव्यापी मोर्चा: डी. राजा ने ‘इंडिया’ गठबंधन को ‘बदलाव जरूरी है’ रैली में शामिल होने का दिया न्योता
नई दिल्ली: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने देश में बढ़ रहे आर्थिक, सामाजिक और लोकतांत्रिक संकट का आरोप लगाते हुए बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ एक देशव्यापी राजनीतिक अभियान का बिगुल फूंक दिया है। पार्टी के महासचिव डी. राजा ने विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के सभी सहयोगी दलों से इस राष्ट्रव्यापी लामबंदी में भाग लेने की अपील की है, जिसका समापन 1 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली “बदलाव जरूरी है रैली” के साथ होगा।
जनविरोधी नीतियों के खिलाफ विपक्षी दलों से एकजुट होने का आह्वान
राष्ट्रीय राजधानी में अभियान की जानकारी देते हुए डी. राजा ने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार की कथित “जनविरोधी नीतियों” के खिलाफ आम जनता को लामबंद करना है। उन्होंने सभी धर्मनिरपेक्ष और विपक्षी दलों से इस आंदोलन में हाथ मिलाने का आह्वान किया है।
डी. राजा ने कहा कि वे ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी दलों से इस देशव्यापी अभियान में हिस्सा लेने की अपील करते हैं। केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ इस लड़ाई में शामिल होने के लिए सभी का स्वागत है। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी धर्मनिरपेक्ष दल इस संघर्ष में एक साथ आएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां केवल कुछ चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हैं।
रामलीला मैदान में 1 सितंबर को होगी महारैली, 6 अगस्त से पदयात्रा
भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, सीपीआई नेता ने नई दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 सितंबर को आयोजित होने वाली “बदलाव जरूरी है रैली” का आधिकारिक पोस्टर भी जारी कर दिया है। यह रैली एक व्यापक देशव्यापी आउटरीच कार्यक्रम का समापन होगी, जिसके तहत 6 अगस्त से 15 अगस्त तक देश भर में विभिन्न स्थानों पर पदयात्राएं आयोजित की जाएंगी।
डी. राजा ने बताया कि इस अभियान के माध्यम से देश के श्रमिकों, किसानों, युवाओं, महिलाओं, छात्रों, दलितों, आदिवासियों और समाज के अन्य सभी वर्गों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि उन बुनियादी मुद्दों को उठाया जा सके जो वर्तमान सरकार के कार्यकाल में और अधिक गंभीर हो गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्थितियों में चिंताजनक गिरावट आ रही है। उन्होंने बढ़ती महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य प्रणालियों के कमजोर होने, प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने, महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन में हो रही देरी, श्रमिकों के अधिकारों पर हमले, चुनावी गड़बड़ियों की आशंकाओं, तथा दलितों व आदिवासियों पर बढ़ते अत्याचार और विस्थापन को देश के सामने मौजूद प्रमुख मुद्दों के रूप में रेखांकित किया है।
