अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हाल ही में हुई बातचीत के बाद भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement – BTA) के अंतरिम ढांचे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। व्हाइट हाउस के अनुसार, दोनों देश आने वाले हफ्तों में लंबित मुद्दों को सुलझाकर इस समझौते को स्थायी स्वरूप देने पर सहमत हैं।
समझौते का मकसद और अहमियत
व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट के मुताबिक, इस अंतरिम समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के व्यापारिक हितों में संतुलन बनाना और भारतीय बाजार में अमेरिकी निर्यातकों की पहुंच को आसान बनाना है।
समझौते के तहत भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं के साथ-साथ खाद्य और कृषि उत्पादों पर लगने वाले शुल्क को खत्म या कम करेगा। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, रेड सोरघम, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स जैसे उत्पाद शामिल हैं।
व्हाइट हाउस ने इसे “समृद्ध भविष्य की दिशा में अहम कदम” बताते हुए कहा कि इससे अमेरिकी उत्पादकों को नए बाजार मिलेंगे और दोनों देशों के बीच व्यापारिक असंतुलन कम करने में मदद मिलेगी।
भारत और अमेरिका की प्रमुख प्रतिबद्धताएं
- भारत ने 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी उत्पादों की खरीद का भरोसा दिया है।
- अमेरिका ने भारत पर लगाए गए अतिरिक्त आयात शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है।
- दोनों देश डिजिटल व्यापार, इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन, निवेश, सेवाओं और श्रम से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे।
- आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक सुरक्षा समन्वय पर सहमति बनी है।
व्हाइट हाउस का कहना है कि यह समझौता भारत-अमेरिका व्यापार को अधिक संतुलित, पारस्परिक और लंबे समय तक लाभकारी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अभी बाकी मुद्दों पर जारी रहेगी बातचीत
दस्तावेज़ के अनुसार, दोनों देश आगे इन विषयों पर चर्चा जारी रखेंगे—
- शेष शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को समाप्त करना
- तकनीकी अवरोध, सीमा शुल्क सुधार और नियामकीय प्रक्रियाएं
- सेवाएं, निवेश, बौद्धिक संपदा, श्रम, पर्यावरण और सरकारी खरीद
- सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़ी व्यापार-विकृत या अनुचित प्रथाओं का समाधान
खास तौर पर भारत ने प्रमुख क्षेत्रों में गैर-शुल्क बाधाएं हटाने और डिजिटल सेवा कर को समाप्त करने की तैयारी जताई है। साथ ही, दोनों देश द्विपक्षीय डिजिटल व्यापार नियमों पर भी बातचीत करेंगे।
वैश्विक व्यापार पर संभावित असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल भारत-अमेरिका व्यापार को ही नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता और तकनीकी सहयोग को भी मजबूती देगा। व्हाइट हाउस के अनुसार, इससे तकनीकी उत्पादों के व्यापार में बढ़ोतरी होगी और संयुक्त तकनीकी साझेदारी का दायरा बढ़ेगा।
यह पहल राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी की हालिया बैठक का नतीजा है, जिसमें दोनों नेताओं ने अंतरिम व्यापार ढांचे पर सहमति जताते हुए इसे स्थायी रूप देने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
व्हाइट हाउस ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद रोकने की प्रतिबद्धता के अनुरूप, अमेरिका ने अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क हटाने का फैसला किया है, जिसके लिए राष्ट्रपति ट्रंप ने कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए।
व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि इस समझौते से अमेरिकी निर्यातकों को भारत के विशाल बाजार में नई संभावनाएं मिलेंगी, जबकि भारतीय अर्थशास्त्रियों के अनुसार यह भारत के लिए तकनीक, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। साथ ही, दोनों देशों को राष्ट्रीय सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी सहयोग के क्षेत्रों में साझा लाभ मिलने की उम्मीद है।
