जमशेदपुर: हाईटेंशन तार की चपेट में आए वंदे भारत तकनीशियन की मौत

जमशेदपुर के टाटानगर रेलवे स्टेशन परिसर की वाशिंग लाइन जहां हाईटेंशन तार की चपेट में आने से तकनीशियन की मौत हुई।

जमशेदपुर के टाटानगर रेलवे स्टेशन पर वंदे भारत ट्रेन की मरम्मत के दौरान एक दुखद हादसा सामने आया है। वाशिंग लाइन में काम करने के दौरान हाईटेंशन बिजली तार की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल तकनीशियन आशीष मांझी की शनिवार देर शाम टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) में इलाज के दौरान मौत हो गई।

टाटानगर रेलवे स्टेशन की वाशिंग लाइन में हुआ हादसा

जमशेदपुर के टाटानगर रेलवे स्टेशन परिसर से एक अत्यंत दुखद घटना प्रकाश में आई है। वंदे भारत ट्रेन की मरम्मत और रखरखाव के कार्य में जुटे एक तकनीशियन की कार्य के दौरान करंट लगने से जान चली गई है। मृतक की पहचान आशीष मांझी के रूप में की गई है, जो वाशिंग लाइन में ट्रेन की मरम्मत का काम कर रहे थे। इसी दौरान वह अचानक वहां से गुजर रहे हाईटेंशन बिजली के तार की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के तत्काल बाद कार्यस्थल पर मौजूद रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें अस्पताल पहुंचाया।

टीएमएच में इलाज के दौरान तोड़ा दम

गंभीर रूप से घायल तकनीशियन आशीष मांझी को बेहतर और त्वरित इलाज के लिए टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के डॉक्टरों की टीम द्वारा किए गए तमाम प्रयासों और उपचार के बावजूद उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सका। शनिवार देर शाम इलाज के क्रम में उन्होंने दम तोड़ दिया। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, तकनीशियन आशीष मांझी की मृत्यु की आधिकारिक सूचना मिलते ही स्थानीय रेलवे कर्मचारियों, सहयोगियों और उनके परिजनों के बीच शोक की लहर दौड़ गई है।

स्टेशन परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

टाटानगर रेलवे स्टेशन परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों में हाईटेंशन तार की चपेट में आने से होने वाली यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि ऐसे हादसों का सिलसिला लगातार बना हुआ है। इससे पूर्व इसी वर्ष 6 मई और 20 मई को भी प्लेटफॉर्म पर खड़ी मालगाड़ी के ऊपर चढ़ने के दौरान दो अलग-अलग लोग हाईटेंशन ओवरहेड तार की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गए थे। उन दोनों घायलों को इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां बाद में उनकी भी मौत हो गई थी। वाशिंग लाइन में हुए इस ताजा हादसे के बाद रेलवे स्टेशन परिसर के भीतर तकनीकी सुरक्षा मानकों, प्रबंधन की सतर्कता और कर्मचारियों की कार्यकालीन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर से गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

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