लखनऊ में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा-जेवर’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद इस निर्णय की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।
यूपी कैबिनेट की बैठक में नाम बदलने के प्रस्ताव पर लगी मुहर
लखनऊ में शुक्रवार को आयोजित उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम अब ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा-जेवर’ होगा।
राज्य मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश को इस विशाल एयरपोर्ट की सौगात देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह हवाई अड्डा उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट और देश का एक प्रमुख एविएशन हब बनने जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने किया था उद्घाटन, 11,200 करोड़ की लागत से निर्माण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल 28 मार्च को इस ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था। इसके बाद 16 जून को लखनऊ से आई इंडिगो की पहली उड़ान इस एयरपोर्ट पर उतरी थी। लगभग 11,200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस प्रोजेक्ट को ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी (Zurich Airport International AG) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (YIAPL) द्वारा केंद्र और राज्य सरकार के साथ साझेदारी में विकसित व संचालित किया जा रहा है।
यमुना एक्सप्रेसवे के पास रणनीतिक रूप से स्थित यह एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का दूसरा नागरिक हवाई अड्डा है। इसे मार्च 2026 में नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) से सभी मौसम में परिचालन (All-weather operations) के लिए एरोड्रम लाइसेंस प्राप्त हुआ था।
विश्वस्तरीय सुविधाएं और एमआरओ सुविधा से लैस
नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण में 3,900 मीटर लंबा रनवे शामिल है, जो बड़े आकार के विमानों (Wide-body aircraft) को संभालने में सक्षम है। रनवे के दोनों छोर पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और एरोनॉटिकल ग्राउंड लाइटिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे कम दृश्यता और रात के समय भी उड़ानों का सुरक्षित संचालन संभव है।
इसके अलावा, यह हवाई अड्डा देश का पहला ऐसा एयरपोर्ट बन गया है जिसमें इन-हाउस मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल (MRO) सुविधा उपलब्ध है। एयरपोर्ट की कार्गो सुविधा को सालाना 2.5 लाख मीट्रिक टन से अधिक माल संभालने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
