सुप्रीम कोर्ट ने 7 मई, 2026 को झारखंड के पारा शिक्षकों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को सहायक शिक्षक और सहायक आचार्य के 50 प्रतिशत आरक्षित पदों पर तत्काल नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने सरकार को एक निश्चित समयसीमा के भीतर भर्ती पूरी करने का आदेश दिया।
पारा शिक्षकों के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर
झारखंड के हजारों पारा शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर आई है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यद्यपि पारा शिक्षक सीधे नियमितीकरण (Regularization) के हकदार नहीं हैं, परंतु मौजूदा भर्ती नियमों के अंतर्गत वे नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होने के पूर्ण अधिकारी हैं। अदालत ने जोर देकर कहा कि पारा शिक्षकों के लिए आरक्षित सीटों पर विचार किया जाना उनका अधिकार है।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देशित किया है कि प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष में पारा शिक्षकों के लिए निर्धारित 50 प्रतिशत आरक्षित रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से पूरी की जानी चाहिए।
भर्ती प्रक्रिया के लिए सख्त समयसीमा निर्धारित
सर्वोच्च अदालत ने इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को गति देने के लिए झारखंड सरकार को सख्त डेडलाइन दी है:
- एक माह के भीतर: रिक्तियों का निर्धारण कर आधिकारिक अधिसूचना जारी करनी होगी।
- 10 सप्ताह के भीतर: विज्ञापन जारी होने के बाद भर्ती की पूरी प्रक्रिया संपन्न करनी होगी।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि झारखंड में शिक्षकों के भारी संख्या में पद रिक्त हैं। आंकड़ों के अनुसार, सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्राथमिक विद्यालयों में 83,595 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 37,133 पद स्वीकृत हैं।
अब तक की नियुक्तियों का विवरण
राज्य सरकार ने सुनवाई के दौरान अदालत को वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। सरकार के अनुसार, मौजूदा नियमों के तहत अब तक कुल 7,300 से अधिक पारा शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है। इनमें से:
- 3,304 शिक्षक: आरक्षित श्रेणी (Reserved Category) के माध्यम से चयनित हुए।
- 3,997 शिक्षक: ओपन श्रेणी (Open Category) के माध्यम से नियुक्त किए गए।
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद झारखंड के पारा शिक्षकों में भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगी है। भारत मंथन लाइव न्यूज इस भर्ती प्रक्रिया से जुड़े हर अपडेट को आप तक पहुंचाता रहेगा।
