कपिल सिब्बल का मोहन भगवत पर हमला: भारत में लोकतांत्रिक तरीकों से सत्ता परिवर्तन

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए।

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने शनिवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के ‘सत्ता परिवर्तन’ वाले बयान की कड़ी आलोचना की। नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि भारत के लोग लोकतांत्रिक तरीकों से सरकार बदलना चाहते हैं, जिसे संघ प्रमुख स्वीकार नहीं करना चाहते हैं।

कपिल सिब्बल का आरएसएस प्रमुख पर निशाना

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिब्बल ने कहा कि देश में बदलाव की जरूरत है और भारत की जनता ने इसका मन बना लिया है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव कब, कैसे और कितनी शांतिपूर्ण तरीके से होगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

नेपाल और बांग्लादेश की तुलना पर हैरानी

सिब्बल ने मोहन भागवत द्वारा भारत में सत्ता परिवर्तन की तुलना नेपाल, बांग्लादेश, अल्बानिया और फ्रांस की हालिया घटनाओं से किए जाने पर गहरी हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के खुले विद्रोहों में जिस तरह की हिंसा हुई, उसका समर्थन कोई नहीं करता। भारत के लोग किसी भी तरह की हिंसा के बजाय पूरी तरह से लोकतांत्रिक माध्यमों से सरकार बदलना चाहते हैं, जिसे संघ प्रमुख स्वीकार करने से बच रहे हैं।

जंतर-मंतर के प्रदर्शन और आरोपों का जिक्र

युवाओं के विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए सिब्बल ने कहा कि जंतर-मंतर पर एकत्र हुए युवाओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और उनके पास कोई हथियार या पत्थर नहीं थे। उन्होंने भूख हड़ताल का भी हवाला दिया और सवाल उठाया कि प्रदर्शन स्थल पर पत्थर से भरा ट्रक कैसे पहुंचा, जिसकी अभी तक कोई निष्पक्ष जांच नहीं हुई है क्योंकि कानून-व्यवस्था केंद्र के नियंत्रण में है।

आरएसएस पर पुराना राजनीतिक आरोप

कपिल सिब्बल ने यह भी आरोप लगाया कि आरएसएस ने अतीत में अरविंद केजरीवाल का समर्थन करके एक अन्य ‘सत्ता परिवर्तन’ में भूमिका निभाई थी, जिससे कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के पतन में मदद मिली। उन्होंने कहा कि इसके बाद नरेंद्र मोदी सत्ता में आए और देश ने उनके 12 साल का कार्यकाल देखा है, जिसका आरएसएस को बड़ा फायदा मिला है।

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