कोलकाता के BM बिड़ला हार्ट हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने 18 महीने की बच्ची की जटिल हृदय सर्जरी सफलतापूर्वक की। बच्ची को दुर्लभ सिंगल-वेंट्रिकल हृदय दोष था और उसकी स्थिति गंभीर थी, जिससे यह ऑपरेशन उच्च जोखिम वाला माना जा रहा था।
कोलकाता में दुर्लभ हृदय सर्जरी सफल
कोलकाता के BM बिड़ला हार्ट हॉस्पिटल में डॉक्टरों की टीम ने 18 महीने की एक बच्ची की जटिल हृदय सर्जरी सफलतापूर्वक की। बच्ची सिंगल-वेंट्रिकल हृदय दोष से पीड़ित थी, जो एक दुर्लभ जन्मजात स्थिति है।
इस स्थिति में हृदय का केवल एक ही कक्ष शरीर में रक्त पंप करने का काम करता है, जबकि सामान्य रूप से यह कार्य दो कक्ष करते हैं।
गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंची थी बच्ची
अस्पताल पहुंचने के समय बच्ची का ऑक्सीजन सैचुरेशन 60% से 65% के बीच था, जो सामान्य स्तर से काफी कम है। साथ ही उसका वजन 7.5 किलोग्राम था, जो उसकी उम्र के अनुसार कम माना जाता है।
इन दोनों कारणों से सर्जरी को उच्च जोखिम श्रेणी में रखा गया था।
सर्जरी के दौरान सामने आई बड़ी चुनौती
इस सर्जरी में सबसे बड़ी चुनौती ऑपरेशन के दौरान दोनों फेफड़ों को सक्रिय रखना था। सामान्यतः ऐसे ऑपरेशन में एक फेफड़े को अस्थायी रूप से निष्क्रिय किया जाता है, लेकिन इस मामले में ऐसा करना संभव नहीं था।
कम ऑक्सीजन स्तर के कारण थोड़ी भी श्वसन कमी से गंभीर नुकसान का खतरा था।
विशेषज्ञ टीम ने मिलकर किया ऑपरेशन
इस सर्जरी का नेतृत्व कंसल्टेंट पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जन डॉ. कुंतल रॉय चौधरी ने किया। पूरी प्रक्रिया के दौरान सर्जन, एनेस्थेटिस्ट और अन्य विशेषज्ञों ने समन्वय के साथ काम किया।
डॉ. कुंतल रॉय चौधरी ने कहा, “इस तरह के मामलों में प्रक्रिया को बच्चे की शारीरिक क्षमता के अनुसार ही संचालित करना होता है। दोनों फेफड़ों को सक्रिय रखना टीम के लिए बड़ी चुनौती थी।”
सफल सर्जरी के बाद रिकवरी में बच्ची
सर्जरी के बाद बच्ची अब रिकवरी में है। यह इलाज का पहला चरण है और आगे आने वाले वर्षों में उसे अन्य चरणों की सर्जरी से गुजरना होगा।
चरणबद्ध उपचार की जरूरत
सिंगल-वेंट्रिकल हृदय दोष का इलाज कई चरणों में किया जाता है। प्रत्येक सर्जरी के बाद शरीर में होने वाले बदलावों के आधार पर अगला उपचार किया जाता है।
