गिरिडीह में सड़क परिवहन को मजबूत करने के लिए 243 करोड़ रुपये की लागत वाले चार सड़क निर्माण प्रोजेक्ट को 26 अप्रैल को केंद्र और राज्य सरकार से मंजूरी मिल गई है। पथ प्रमंडल ने तकनीकी स्वीकृति के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है।
गिरिडीह में सड़क परियोजनाओं को मिली मंजूरी
गिरिडीह में सड़क ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने कुल 243 करोड़ रुपये की लागत वाली चार प्रमुख सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी है। पथ प्रमंडल ने इन योजनाओं के लिए तकनीकी स्वीकृति प्राप्त कर ली है और फिलहाल टेंडर प्रक्रिया जारी है।
पथ प्रमंडल के सूत्रों के अनुसार, इन परियोजनाओं में केंद्र सरकार के सीआरएफ और राज्य सरकार के फंड का उपयोग किया जाएगा।
गिरिडीह–जमुआ सड़क का होगा पुनर्निर्माण
राज्य सरकार के 1 अरब 12 करोड़ रुपये के फंड से गिरिडीह वाया तेलोडीह जमुआ तक 29 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना के तहत पुरानी सड़क को तोड़कर नए सिरे से निर्माण किया जाएगा और सड़क की चौड़ाई 10 मीटर की जाएगी।
तिसरी क्षेत्र में 90 करोड़ की सड़क योजना
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के गृह प्रखंड तिसरी के दलपतडीह क्षेत्र में 22 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना के तहत सड़क को 7 मीटर चौड़ा किया जाएगा।
इस कार्य के लिए केंद्र सरकार के सीआरएफ फंड से 90 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
गांडेय में भी सड़क निर्माण प्रस्तावित
गिरिडीह जिले के गांडेय क्षेत्र के बड़कीटांड में करीब 7.5 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य किया जाएगा। इस परियोजना की लागत 32 करोड़ रुपये है और इसमें भी सड़क चौड़ीकरण का प्रस्ताव शामिल है।
टेंडर प्रक्रिया जारी, जल्द शुरू होगा काम
पथ मंत्रालय के निर्देश के बाद सभी परियोजनाओं को तकनीकी मंजूरी मिल चुकी है और अब टेंडर प्रक्रिया जारी है। टेंडर पूरा होने के बाद चयनित एजेंसियां निर्माण कार्य शुरू करेंगी।
सूत्रों के अनुसार, कोडरमा की अमिताभ कंस्ट्रक्शन कंपनी सहित बिहार के गया जिले से जुड़ी एक एजेंसी भी इन परियोजनाओं के टेंडर लेने के प्रयास में लगी है।
अधूरी परियोजनाएं अब भी चिंता का विषय
इस बीच, गिरिडीह तेलोडीह फोरलेन सड़क परियोजना अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। 36 करोड़ रुपये की इस योजना में लगभग 95 प्रतिशत भुगतान हो चुका है, जबकि करीब 6 करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है।
इसके बावजूद ठेकेदार ने कार्य अधूरा छोड़ दिया है और कई हिस्सों में निर्माण कार्य अब भी लंबित है।
