प्रतिज्ञा पवार और शेते की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा शाह रुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ सहित प्रसिद्ध अभिनेताओं को नोटिस भेजे जाने के बाद मुंबई में मशहूर हस्तियों के सामाजिक दायित्वों पर बहस छिड़ गई है। तंबाकू नियंत्रण कानूनों के बावजूद ‘इलायची’ या ‘माउथ फ्रेशनर’ के नाम पर सरोगेट विज्ञापनों का खेल जारी है।
प्रतिज्ञा पवार और शेते की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा बॉलीवुड स्टार शाह रुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ समेत अन्य कलाकारों को नोटिस जारी किए जाने के बाद सेलीब्रिटीज की सामाजिक जिम्मेदारी पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष विज्ञापनों पर कानूनी प्रतिबंध
भारत में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) की धारा 5 के तहत तंबाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष (Direct) और अप्रत्यक्ष यानी सरोगेट (Surrogate) विज्ञापन, प्रचार और प्रायोजन (Sponsorship) पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है।
केंद्र सरकार का राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (NTCP) भी इस नियम का सख्ती से समर्थन करता है। इसके बावजूद बाजार में नियमों को दरकिनार कर विज्ञापन जारी हैं।
‘माउथ फ्रेशनर’ और ‘इलायची’ के नाम पर विज्ञापन
जब तंबाकू और निकोटिन युक्त उत्पादों का सीधे तौर पर विज्ञापन नहीं किया जा सकता, तब कंपनियां ‘इलायची’, ‘माउथ फ्रेशनर’ या अन्य संबंधित उत्पादों के नाम पर ब्रांड का प्रचार करती हैं।
- इस पूरी व्यवस्था में करोड़ों रुपये का विज्ञापन कारोबार शामिल है।
- कानून की कमियों और खामियों का फायदा उठाकर ब्रांड को उपभोक्ताओं के सामने लाया जाता है।
- मशहूर हस्तियों का प्रभाव युवाओं की आदतों को प्रभावित करता है।
- पर्यवेक्षकों का मानना है कि मुख्य समस्या कानून की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि इसके क्रियान्वयन (Enforcement) और वाणिज्यिक रणनीतियों में है।
जनस्वास्थ्य और सामाजिक दायित्व की चुनौती
तंबाकू उत्पादों का यह अप्रत्यक्ष प्रचार न केवल युवाओं में हानिकारक आदतें विकसित करता है, बल्कि उपभोक्ताओं के अपने विवेक और निर्णय क्षमता पर भी असर डालता है। कानूनी विशेषज्ञों और विश्लेषकों का कहना है कि व्यावसायिक हितों और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना वर्तमान समय की बड़ी आवश्यकता है।
