अमेरिकी टैरिफ से सोलर शेयरों में भारी गिरावट

अमेरिकी टैरिफ से सोलर शेयरों में भारी गिरावट

मुंबई में 25 फरवरी 2026 को अमेरिकी वाणिज्य विभाग द्वारा भारत से आयातित सोलर सेल और पैनल पर 125.87% काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाने की घोषणा के बाद सोलर कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में वारी एनर्जीज सहित कई कंपनियों के शेयर टूट गए।

अमेरिकी टैरिफ से सोलर शेयरों में गिरावट

अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने भारत से आयात होने वाले सोलर सेल और पैनल पर लगभग 126% (125.87%) की प्रारंभिक काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) लगाने का फैसला किया है। इस निर्णय का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में साफ दिखाई दिया।

मुंबई में शुरुआती कारोबार के दौरान सोलर और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में तेज बिकवाली देखी गई।

वारी एनर्जीज और प्रीमियर एनर्जीज पर सबसे ज्यादा असर

देश की प्रमुख सोलर मॉड्यूल निर्माता वारी एनर्जीज का शेयर 14.6% तक गिरकर 2,580.50 रुपये के लोअर सर्किट पर पहुंच गया। बाद में मामूली सुधार के साथ यह 2,724 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखा।

हाल ही में सूचीबद्ध प्रीमियर एनर्जीज का शेयर इंट्रा-डे में 12% से अधिक गिरकर 666.90 रुपये तक पहुंच गया।

अन्य कंपनियों में विक्रम सोलर के शेयर में 7%, वारी रिन्यूएबल टेक्नोलॉजीज में 6% और सोलेक्स एनर्जी में 5% की गिरावट दर्ज की गई।

अमेरिकी फैसले का आधार

यह कार्रवाई ‘अलायंस फॉर अमेरिकन सोलर मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेड’ की याचिका पर की गई है, जिसमें First Solar जैसी कंपनियां शामिल हैं।

अमेरिका का आरोप है कि भारत, इंडोनेशिया और लाओस अपनी सोलर कंपनियों को सरकारी सब्सिडी दे रहे हैं, जिससे अमेरिकी निर्माताओं को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

अमेरिका ने भारत पर 125.87%, इंडोनेशिया पर 104.38% और लाओस पर 80.67% की सब्सिडी दरें तय की हैं। वर्ष 2025 में अमेरिका के कुल सोलर आयात का लगभग दो-तिहाई, करीब 4.5 बिलियन डॉलर, इन्हीं तीन देशों से आया था।

आगे एंटी-डंपिंग ड्यूटी की आशंका

अमेरिकी वाणिज्य विभाग मार्च में यह तय करेगा कि संबंधित देश उत्पादन लागत से कम कीमत पर उत्पाद बेच रहे हैं या नहीं। यदि ऐसा पाया जाता है तो अतिरिक्त एंटी-डंपिंग ड्यूटी भी लगाई जा सकती है।

इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी से भारत पर 10% अस्थायी टैरिफ लागू किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि धारा 232 और 301 जैसे व्यापारिक कानूनों का उपयोग भी किया जा सकता है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इन टैरिफ से भारतीय कंपनियों की निर्यात आय प्रभावित हो सकती है, जिसका असर उनके मुनाफे पर पड़ सकता है।

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