उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें कहा गया था कि पत्नी अपने पति पर लगाए गए व्यभिचार के आरोप को साबित करने के लिए उसके फोन कॉल विवरण रिकॉर्ड (सीडीआर) और होटल की बुकिंग संबंधी जानकारी जैसे साक्ष्य जुटाने में अदालत की सहायता मांग सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: व्यभिचार के मामले में निजता के अधिकार की दलील खारिज
नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के एक महत्वपूर्ण फैसले को बरकरार रखा है। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी पत्नी अपने पति पर लगाए गए व्यभिचार (अडल्ट्री) के आरोपों को साबित करने के लिए साक्ष्य जुटाने के वास्ते कानूनी मदद ले सकती है। न्यायालय के मुताबिक, पत्नी अपने पति के फोन कॉल विवरण रिकॉर्ड (सीडीआर) और होटल बुकिंग संबंधी जानकारी जैसे साक्ष्य जुटाने में अदालत की सहायता मांग सकती है।
न्यायालय ने इस मामले में व्यभिचार के आरोपी पति की ओर से दी गई निजता के अधिकार की दलील को पूरी तरह खारिज करने का फैसला बरकरार रखा है।
उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर अपील खारिज
यह निर्णय न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ द्वारा सुनाया गया। पीठ ने एक व्यक्ति द्वारा उच्च न्यायालय के 10 मई 2023 के आदेश के खिलाफ दायर की गई अपील को सिरे से खारिज कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय के इस कड़े रुख से साफ हो गया है कि पारिवारिक और वैवाहिक विवादों में व्यभिचार जैसे गंभीर आरोपों की सत्यता जांचने के लिए प्रासंगिक साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया को निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।
